सपा महासचिव राज्यसभा सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव 11 साल पुराने एक मामले में गवाही देने बुधवार को एडीजे प्रथम प्रमोद कुमार की कोर्ट में पेश हुए। मामले में नामजद डीपी यादव को कोर्ट सितंबर 2009 में बरी कर चुका है। दो अन्य आरोपियों रामवीर और मानिक उर्फ मनका को पहचानने से रामगोपाल यादव ने इंकार कर दिया। कोर्ट ने सुनवाई को अगली तारीख 10 सितंबर निर्धारित की है।
रामगोपाल यादव ने 2005 का चुनाव संभल लोकसभा से लड़ा था। उनके खिलाफ डीपी यादव चुनाव मैदान में थे। चुनाव के दौरान रामवीर, मानिक उर्फ मनका निवासी हिरौनी थाना रजपुरा और डीपी यादव के खिलाफ धारा 147, 148, 149 और 307 आईपीसी में मुकदमा दर्ज कराया था। ये घटना चुनाव के समय ही 10 मई 2004 की बताई गई थी। 10 सितंबर 2009 को तत्काीन एडीजे अष्टम ने डीपी यादव को बरी कर दिया था। मामले में रामवीर और मानिक उर्फ मनका आरोपी बचे थे। रामगोपाल यादव की गवाही होनी थी। बुधवार को रामगोपाल यादव कोर्ट में गवाही देने को पेश हुए। रामगोपाल से जिरह सरकारी वकील मिर्जा राशिद बेग ने की। बयान दर्ज कराने के बाद वह बदायूं से रवाना हो गए।
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प्रोफेसर रामगोपाल का बयान
मैं उस दिन बबराला टीसीएम में मौजूद था। मुझे उस दिन सूचना मिली उसमें केवल डीपी यादव का नाम था। अन्य किसी व्यक्ति का नाम। नहीं बताया गया। यह सही है कि दरोगा जी को मैंने अपने बयान में डीपी यादव का नाम बताया था, अन्य किसी का नाम नहीं बताया। मैं अभियुक्त रामवीर व मानिक को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता।