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मीटर चालू, पर नहीं आ रहे बिल...बैठे बिठाए करोड़ों कमा लेगा महकमा

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बदायूं। बिजली चोरी रोकने के उद्देश्य से शहर में अंडरग्राउंड केबल डाली गई, लेकिन इससे फैली अव्यवस्थाओं से अब लोग परेशान हो रहे हैं। इन केबल से न केवल शहर की सड़कें ध्वस्त हो गईं, बल्कि गलियों में तो लोगों का निकलना तक दूभर हो गया। अव्यवस्थाओं का दौर यहीं नहीं रुका। खुले पड़े तार और केबल बॉक्स में आ रहे करंट ने जानवरों की जान लेनी शुरू कर दी। इस दौरान कार्यदायी संस्था की ओर से घरों में पहले से लगे बिजली के मीटर को उखाड़कर नए इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाए गए, लेकिन इसमें भी खेल कर दिया गया। शहर के अधिकतर इलाके ऐसे हैं जहां मीटर तो लग गए, लेकिन बिजली का बिल नहीं आ रहा। ऐसे में इन मीटर की रीडिंग बढ़ती जा रही है। अब उपभोक्ताओं को न केवल एक साथ बिल देने पर एकमुश्त रकम की व्यवस्था करनी होगी, बल्कि निर्धारित यूनिट खर्च करने के बाद प्रति यूनिट बढ़ने वाली धनराशि से बिल भी बढ़कर आएगा। यदि हिसाब लगाया जाए तो यह धनराशि करोड़ों में बैठेगी, यानी उपभोक्ताओं को बिल न देकर विभाग बैठे बिठाए करोड़ों कमा लेगा।
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अंडरग्राउंड केबल डालने में नेताओं ने अपने आर्थिक हित तो साध लिए, लेकिन जनता के लिए मुसीबतें खड़ी कर दीं। शुरू से ही यह प्रक्रिया विवादों में रही। अनेक लोगों ने इसकी शिकायत की, लेकिन शिकायतों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे लोग परेशान होकर शांत हो गए, लेकिन केबल डालने के बाद जिन घरों में मीटर लग गए हैं, उन घरों के उपभोक्ताओं को और भी ज्यादा परेशानी हो रही है। कई घरों में पावर कॉरपोरेशन की ओर से मीटर लगे कई माह हो गए हैं, लेकिन बिल अब तक नहीं मिल सके हैं। उन्होंने इस बारे में संबंधित अवर अभियंता, एसडीओ टाउन से लेकर अधिशासी अभियंता तक को बताया, लेकिन हर बार उन्हें यही कहकर वापस कर दिया गया कि उनके मीटर का नंबर अब तक कंप्यूटर में चढ़ा नहीं है, जल्द ही उसे चढ़ा लिया जाएगा। उसके बाद में बिजली का बिल उन्हें प्राप्त होने लगेगा। अफसरों ने ऐसी तकनीकी बात बताई, तो उपभोक्ता भी ये मानकर लौटने लगे।
उपभोक्ताओं का कहना है कि निश्चित यूनिट खर्च करने पर उनको एक निश्चित धनराशि का बिल देना होता है, लेकिन निर्धारित यूनिट बढ़ने पर प्रति यूनिट की दर भी बढ़ जाती है। ऐसे में मीटर लगने और बिल न पहुंचने से उन पर दोहरी मार पड़ना तय है। बिजली विभाग की गलती का खमियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा, क्योंकि वे एक साथ में इतना बिल का भुगतान नहीं कर पाएंगे।
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इस प्रकार होता है बिजली बिल में खेल
पावर कॉरपोरेशन के आंकड़ों की मानें तो शहर में एक किलोवाट के करीब 16 हजार उपभोक्ता हैं। प्रत्येक उपभोक्ता से कनेक्शन के नाम पर प्रतिमाह 50 रुपये फिक्स चार्ज लिया जाता है, साथ ही शून्य से लेकर सौ यूनिट तब बिजली खर्च करने तीन रुपये प्रति यूनिट वसूली की जाती है। उपभोक्ता का मीटर जैसे ही सौ यूनिट से ऊपर 150 तक बढ़ता है, तो उपभोक्ताओं को तीन रुपये की जगह 4.90 रुपये के हिसाब से भुगतान करना होता है, साथ ही मीटर का फिक्स चार्ज भी दोगुना हो जाता है। ऐसे ही 151 से 300 यूनिट तक उनसे 5.40 रुपये लिए जाते है, वहीं 600 यूनिट पर उपभोक्ताओं को 6.20 रुपये के हिसाब से बिल का भुगतान करना होता है।
इसी प्रकार शहर में दो किलोवाट के 12 हजार 585 उपभोक्ता हैं। इसमें फिक्स चार्ज दो सौ रुपये लिया जाता है। इसमें 150 यूनिट तक 4.90 रुपये के हिसाब से भुगतान लिया जाता है, वहीं 150 से तीन सौ यूनिट तक 5.40 रुपये 351 से पांच सौ यूनिट तक 6.20 रुपये व पांच सौ यूनिट से अधिक पर 6.20 रुपये वसूली की जाती है। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं को एक साथ कई महीने का बिल मिलेगा, तो उन्हें दो गुने से भी ज्यादा का बिल देना होगा।

अब तक लगे लगभग आधे मीटर
शहर में बिजली उपभोक्ताओं के लगभग 44 हजार कनेक्शन हैं, जबकि मीटर अभी 23, 290 उपभोक्ताओं के ही लग पाए हैं। इस प्रकार अभी लगभग आधे ही मीटर लगे हैं। इनके आधे ऐसे हैं, जिनके मीटर लगे पांच से छह माह हो गए हैं, लेकिन उन्हें बिल अब नहीं मिल पाए हैं। जाहिर सी बात है कि ये उपभोक्ता जब अपना बिल जमा करेंगे तो उन्हें दोगुनी से ज्यादा राशि का भुगतान करना होगा। ऐसे में विभाग को करोड़ों का फायदा होगा।
जहां-जहां पर मीटर लगे हैं, उन सभी उपभोक्ताओं के पास बिल पहुंच रहा है। अगर किन्हीं कारणवश बिजली का बिल नहीं पहुंच रहा है, तो ऐसे उपभोक्ता अपनी समस्या को बताएं, तत्काल उनकी समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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-मधुप श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता
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