मेला ककोडा। पतित पावनी मां गंगा के तट पर लगा मिनी कुंभ मेला ककोड़ा धीरे-धीरे सिमटने लगा है। मंगलवार को मेले में लगे झूले उखड़ने लगे। हालांकि बड़ी-बड़ी दुकानें अभी सजी हैं, जिन पर स्थानीय लोग खरीदारी कर रहे हैं। औपचारिक रूप से मेला 30 नवंबर को समाप्त होगा।
मेला ककोड़ा की औपचारिक शुरुआत 16 नवंबर से हुई थी, लेकिन उद्घाटन मुख्य स्नान से एक दिन पहले 22 नवंबर को हुआ था। तीन दिन मेला पूरे शबाब पर रहा। 25 नवंबर से कल्पवासी रवाना होने शुरू हुए तो मेले की रौनक भी कम होने लगी। कल्पवासियों के चले जाने से आबादी क्षेत्र पूरी तरह खाली हो गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रम बंद होने के बाद जिला पंचायत के कर्मचारी भी चले गए। मगर मेले में अभी बड़ी-बड़ी दुकानें सजी हैं। आसपास गांवों में रहने वाले रोज मेला जाकर अपने जरूरत की चीजें खरीद रहें हैं। मेले में लगे बड़े झूले भी मंगलवार को उखड़ने लगे। मेले में भीड़ न होने से छोटे दुकानदार भी जाने लगे हैं। अब मेला पहुंचने वालों में कासगंज और बदायूं जिले के लोग बचे हैं, जो शादियों और घरेलू आवश्यकताओं की वस्तुएं खरीदने में लगे हैं। सबसे ज्यादा बिक्री लाठी-डंडा और पशुओं के उपयोग की वस्तुओं के अलावा ढोलक कंबल की हैं। मेले में दुकानें लगी होने की वजह से मेला कोतवाली पुलिस मुस्तैद है। कुछ चीता मोबाइल टीमों को भी बुला लिया गया है।
मेला ककोड़ा अभी तीन दिन और चलेगा, लेकिन जिला पंचायत प्रशासन सड़कों पर अब न तो पानी का छिड़काव करा रहा है और न ही ड्यूटी पर लगे लोग ही दिखाई दे रहे हैं। गंगा तट पर भी गंदगी के अंबार लगे हैं। इससे मेला पहुंच रहे लोग और दुकानदार परेशान हैं।