कैसे रोकेंगे नकल, विद्यालयों
में नहीं लगे वायस रिकॉर्डर
बदायूं। प्रदेश सरकार की ओर से नकलविहीन परीक्षा कराने पर जोर है। इसको लेकर पिछली साल सभी सेंटरों पर सीसी टीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए थे, इसमें काफी हद तक नकल को रोकने में मदद मिली। लेकिन नकल माफिया ने इसका भी तोड़ निकल लिया। इसके चलते माध्यमिक शिक्षा सचिव ने प्रत्येक परीक्षा सेंटर पर वायस रिकॉर्डर और एक कक्षा में दो कैमरे लगाने के निर्देश दिए, लेकिन अब कहीं पर भी वायस रिकॉर्डर नहीं लगा है और न प्रत्येक कक्षा में दो कैमरे लगे हैं। ऐसे में नकलविहीन परीक्षा के दावे सिर्फ दावे ही नजर आ रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ ने जब प्रदेश की कमान संभाली। तब से उन्होंने दलालों और माफिया पर नकेल कसना शुरू कर दी। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में धांधली चलती थी। इसकी जानकारी जिले से लेकर सूबे तक के अधिकारियों को थी कि बोर्ड की परीक्षाओं में नकल ठेके के आधार पर कराई जाती है। किस विद्यालय के सेंटर कहां रखा जाना है, वहां पर कौन शिक्षक ड्यूटी करेगा। साथ ही कौन से अधिकारी विद्यालय में चेकिंग के लिए कब पहुंचेगा। सभी को पहले से निर्धारित होता था। अगर बीच में कोई अधिकारी आता था। तो उसकी जानकारी तुरंत नकल माफिया तक पहुंच जाती थी। इस खेल को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बदलाव करते हुए प्रत्येक विद्यालय हर कक्षा में एक-एक सीसी टीवी कैमरा लगाने के लिए गत वर्ष निर्देश दिए। इससे नकल माफिया पर काफी हद का नकेल कस गई। लेकिन उन्होंने इसका तोड़ निकला लिया। ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से नया शासनादेश जारी हुआ। इसमें प्रत्येक विद्यालय में दो-दो कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए। साथ ही वायस रिकॉर्डर लगाने को भी कहा गया। ताकि नकल माफिया का चक्रव्यूह पूरी तरह से खत्म किया जा सकें। लेकिन इसमें भी नकल माफिया ने अपना हस्तक्षेप शुरू कर दिया है। जिले में बनाए गए 83 परीक्षा केंद्रों में आधे से अधिक सेंटरों पर वायस रिकॉर्डर नहीं लगाया गया है। ऐसे में नकलविहीन परीक्षा करा पाना अपने आप में एक सवाल खड़ा कर रहा है।
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शासन की ओर जिले में 83 परीक्षा सेंटर बनाए गए हैं। इन पर आपत्ति मांगी गई है। इसके बाद में सभी विद्यालयों में मानकों की जांच की जाएगी। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
- डॉ. एसपी सिंह, प्रभारी डीआईओएस