बदायूं। स्वास्थ्य महकमा झोलाछाप के क्लीनिक पर छापामारी कर सिर्फ खानापूर्ति करता है। जिले के दो दर्जन से ज्यादा क्लीनिक ऐसे है जिनको कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस भेज दिया गया। सीएमओ कार्यालय के सूत्र बताते हैं कि नोटिस तो विभाग की कमाई का एक जरिया है।
जिले में सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर दुकानें खोले हुए हैं। दुकानों में ही बेड डालकर ड्रिप चढ़ाना और मरीज से मनमाने दाम वसूलने का धंधा धड़ल्ले लंबे समय से हो रहा है। झोलाछाप क्लीनिक और अस्पताल में कंपाउंडर का काम करके खुद को डॉक्टर बताते हैं। उसके बाद भी मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ विभाग की कार्रवाई नोटिस जारी करने तक ही रहती है। घनी बस्तियों की गली में झोलाछाप की दुकानें आसानी से देखने को मिल जाती हैं। जो बिना डिग्री के लोगों का इलाज कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने छह माह में करीब 25 झोलाछाप को नोटिस जारी किए हैं लेकिन इनके खिलाफ कार्रवाई कुछ नहीं की है।
-------
सीएमओ कार्यालय है कमाई का जरिया
सीएमओ कार्यालय परिसर में काम करने वाले एक लिपिक ने बताया कि अगर कोई झोलाछाप की जानकारी यहां आकर देता तो टीम मौके पर छापेमारी के लिए जाती है। उसके बाद सीएमओ कार्यालय से नोटिस जारी कर झोलाछाप को बुलाया जाता है। कार्यालय के संपर्क में आते ही झोलाछाप को कार्रवाई की धमकी देकर बचाव के रास्ते बताए जाते हैं। इसके लिए उनसे रकम वसूली कर मामला रफादफा कर दिया जाता है।
------
कार्रवाई कम फजीहत ज्यादा होती है
शिकायत पर सीएमओ भी टीम के साथ झोलाछाप के क्लीनिकों, दुकानों और अस्पतालों पर छापेमारी के लिए खुद जाते है, इस दौरान कार्रवाई कम डॉक्टरों की फजीहत ज्यादा होती है। एक महीने पहले सीएमओ ने नेकपुर स्थित एक हॉस्पिटल को अवैध घोषित कर सील करने को नोटिस जारी किया था। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। हाल ही में एक झोलाछाप का क्लीनिक सील किया गया था वह भी जब मामला एडी हेल्थ सहित कई बड़े अधिकारियों के पास पहुंचा।
--
पिछले छह महीने में झोलाछाप के खिलाफ 41 शिकायतें आईं। जांच कराने के बाद 25 को नोटिस जारी किया गया। इनमें आठ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई और एक क्लीनिक सील किया गया।
- डॉ. नेमी चंद्रा