बिजनौर में खेत में पकी खड़ी गेहूं की फसल।
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गेहूं की कटाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर
बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की दावतों के दौर में किसानों के गेहूं की कटाई अधर में अटकी हुई है। गांवों में चल रही दावतों के चक्कर में मजदूरों ने गेहूं की कटाई से किनारा कर लिया है। गांवों में गेहूं काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जिले में गेहूं की फसल खेतों में पकी खड़ी है। जिले में केवल कुछ ही किसानों के खेतों में कंबाइन मशीन से गेहूं की कटाई और गहाई एक साथ होती है। बाकी किसान मजदूरों से ही गेहूं कटवाते हैं। पिछले साल लॉक डाउन के समय बाहर रहकर काम करने वाले मजदूर घर आ गए थे। तब गेहूं कटवाने में किसानों को कोई परेशानी नहीं हुई थी। बाहर से आए मजदूरों ने खेतों में गेहूं काट दिए थे। इस बार चुनाव का माहौल है। चुनाव में दावतों का दौर शुरू हुए महीनों हो चुके हैं। गांवों में दावतों का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो जाता है जो देर रात तक जारी रहता है। ऐसे में दावतों के दौर को छोड़कर मजदूर भी खेतों में जाना पसंद नहीं कर रहे हैं।
इसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। खेतों में गेहूं की फसल काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूर न मिलने से फसल खेतों में ऐसे ही खड़ी है। फसल कटने में जितना ज्यादा देरी होगी वह सूखने की वजह से काटते समय उतनी ही टूटती है। इससे गेहूं का दाना खेत में ही गिर जाता है। किसान जितेंद्र सिंह, जसवंत सिंह, अजब सिंह आदि का कहना है कि गेहूं की फसल तैयार है, लेकिन कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूर अभी चुनाव की दावतें उड़ाने में व्यस्त हैं। मजदूरों के खेतों में न आने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।