- मीरापुर मंडी में भी इस बार बेचा हर्बल गुलाल
- जिले में भी बढ़ रही हर्बल गुलाल की मांग
फोटो-20,21,22
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। हर्बल होली मनाने के लिए महिलाएं गुलाल बना रही है। नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा किनारे बसे गांवों की महिलाएं कई समूहों को हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया गया है। बिजनौर के रावली, मुजफ्फरनगर के कटिया, देवल की महिलाएं हर्बल गुलाल बना रही हैं।
बदलते दौर के साथ हर्बल गुलाल की मांग बढ़ रही है। केमिकल रंग से दूरी बनाकर लोग हर्बल गुलाल का ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं। जिसके चलते जिले में भी महिलाएं हर्बल गुलाल बना रही हैं। महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे हर्बल गुलाल को मीरापुर मंडी, सभी ब्लॉकों और सरकारी कार्यालय में भेजा रहा है। महिलाओं के समूह ने अब तक 70 किलो हर्बल गुलाल बनाया है। अभी मांग बढ़ने पर और हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है।
पालक, हल्दी, चकुंदर से बनाया जा रहा हर्बल गुलाल
गुलाल बनाने के लिए सबसे अरारोट की जरूरत पड़ती है। गुलाल को अलग-अलग रंग देने के लिए सब्जी और फलों का प्रयोग किया जा रहा है। मौसम्बी के छिलके और पोदीना से हरे रंग का गुलाल बनाया जा रहा है। हल्दी और संतरे के छिलके से पीला गुलाल, चकुंदर से लाल और गुलाबी गुलाल बनाया जा रहा है। इसके अलावा इनसे कई प्रकार के रंगों का हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है। प्रयास समूह की महिला रजनी ने बताया कि तीन घंटे में हर्बल गुलाल तैयार हो जाता है। मगर इसे सुखाने में एक दिन का समय लगता है।
350 रुपये किलो तक बिक रहा हर्बल गुलाल
बाजार में एक किलो हर्बल गुलाल 300 से 350 रुपये तक बेचा जा रहा है। एक समूह 300 रुपये किलो बेच रहा है। जबकि दूसरा समूह 350 रुपयेे में एक किलो हर्बल बेच रहा है। इससे महिलाओं की आजीविका बढ़ी है। हर्बल गुलाल की मांग लगातार बढ़ रही है। लोग केमिकल रंग का मोह छोड़ हर्बल गुलाल की तरफ बढ़ रहे हैं।
वर्जन::
महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। जिसके चलते महिलाएं फल और सब्जियों से हर्बल गुलाल बना रही है। सरकारी कार्यालयों में भी हर्बल गुलाल की मांग बढ़ी है। इस बार मीरापुर मंडी में भी हर्बल गुलाल बेचा जा रहा है।.....अनु सैनी, प्रोजेक्ट असिस्टेंट, भारतीय वन्य जीव संस्थान