- संचालक पदों के लिए जारी किया जा चुका है आरक्षण
- 11 मार्च से चालू हो जाएगी समितियों के चुनाव की प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले की किसान सहकारी समितियों में चुनाव का बिगुल बज चुका है, फिलहाल (पैक्स) सहकारी समितियों में मतदाता सूची तैयार हो रही है। उधर, संचालक पदों के लिए आरक्षण जारी कर दिया गया है। समितियों के बोर्ड में शामिल होने के लिए किसान नेता पुरजोर कोशिशों में लग गए हैं।
प्रारंभिक सहकारी समितियों की चुनाव प्रक्रिया 11 मार्च से शुरू हो जाएगी। जिलें में 94 प्रारंभिक सहकारी समिति अर्थात पैक्स के चुनाव होने हैं। इसके अलावा एक दो वेतन भोगी सहकारी समिति के भी चुनाव हैं। प्रारंभिक समिति के सदस्य किसान होते हैं। सदस्य दो प्रकार के होते हैं। पहले सक्रिय सदस्य यानि लेनदेन करने वाले तथा दूसरे निष्क्रिय सदस्य होते हैं। हर समिति निर्वाचक सदस्यों की सूची तैयार करने में लगी है। हर समिति की सदस्य की संख्या के अनुसार निर्वाचक सूची होगी। बता दें कि सहकारी समितियों के चुनावों को राजनीति का प्रवेश द्वार माना जाता है। जिसके चलते सहकारी समितियों के चुनावों में आखिरी छोर में रहने वाले ग्रामीणों की भी दिलचस्पी बढ़ी है। प्रथम चरण में प्रारंभिक सहकारी ऋण समितियों के चुनाव है। दावेदार सूची का पता लगाने के लिए समिति आ रहे हैं।
सबसे अधिक सक्रियता पैक्स चुनाव में
जिले में सहकारी समितियों का जाल बिछा है। मिली जानकारी के अनुसार जिले में 500 से अधिक सहकारी समिति विभिन्न क्षेत्रों में संचालित हैं। प्रारंभिक सहकारी ऋण समितियां अर्थात पैक्स, दुग्ध सहकारी समिति, गन्ना सहकारी समिति, मत्स्य सहकारी समिति, वेतन भोगी ऋण सहकारी समिति, हथकरघा ग्रामोद्योग सहकारी समिति,खादी ग्रामोद्योग समिति, उद्यान सहकारी समिति आदि प्रमुख हैं। इनमें सबसे अधिक सक्रियता प्रारंभिक सहकारी ऋण समितियों अर्थात पैक्स में रहती है। क्योंकि पैक्स में मतदाता अधिक होते हैं।
बेहतर सुविधाएं दिलाने का रहता है चुनावी मुद्दा
सहकारिता के जानकार जगदीश चंद्र के अनुसार जिले की प्रारंभिक सहकारी ऋण समितियां खूब व्यवसाय कर रही है। खाद,बीज के अतिरिक्त दैनिक उपभोग की सामग्री उचित रेट पर उपलब्ध करा रही है। समितियां मुनाफा कमा रही है। समिति सदस्यों को 10 प्रतिशत लाभांश देती है। दावेदार किसानों को बेहतर सुविधाएं दिलाने का आश्वासन देकर चुनाव मैदान में उतरते हैं। जिले की कई समिति का करोड़ों का सालाना टर्नओवर है। समिति राज्य स्तर पर पुरस्कृत हो चुकी है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए समितियों ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त किया है।