- 600 महिलाएं तालाब में पाल रहीं मछलियां
- आय बढ़ाकर परिवार की कर रही आर्थिक मदद
नंबर गेम
-816 तालाब बिजनौर में चल रहे
-600 तालाबाें में हो रहा मत्स्य पालन
-40 प्रतिशत तालाब में मछली पालन पर मिल रहा अनुदान
-2300 मत्स्य पालक हैं बिजनौर जिले में
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। अब आधी आबादी घूंघट में नहीं महिलाएं, खेल से लेकर कारोबार तक अपनी पहचान बना रही हैं। इसी क्रम में अब महिलाएं मछली पालन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। जिले में इस समय 600 महिलाओं तालाबों में मछली पालन कर परिवार की आर्थिक स्थिति में सहयोग कर रही हैं। धीरे-धीरे महिलाएं घर से निकलकर व्यापार संभाल रही हैं।
महिलाएं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। कुटीर उद्योग के माध्यम से भी महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। बिजनौर में मत्स्य विभाग में 2300 मत्स्य पालक पंजीकृत हैं। जिनमें से 600 महिलाएं हैं। महिलाएं मछली पालन करने के साथ-साथ बाजार में भी बेच रही हैं। मत्स्य विभाग सेे मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 816 तालाब हैं। जिनमें से करीब 600 तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है। मछली पालन के लिए पालक के पास अपनी निजी या पट्टे की जमीन होनी चाहिए। जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को मत्स्य पालन के बारे में बताया जा रहा है।
मत्स्य पालन की योजनाओं पर दिया जा रहा 40 प्रतिशत का अनुदान
मत्स्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक मत्स्य विभाग की योजनाओं में पालकों को 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत चार लाख रुपये का व्यापार किया जाता है। इस योजना में सरकार की ओर से 40 प्रतिशत का अनुदान मत्स्य पालन करने पर दिया जा रहा है। वहीं निषादराज बोट योजना पर भी सरकार की ओर से 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। यह योजना 67 हजार रुपये की है। शनिवार से इन दोनों योजनाओं के लिए पोर्टल खोला जा रहा है। मत्स्य पालक इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
वर्जन::
महिलाओं को मत्स्य पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाकर महिलाओं को मत्स्य पालन के लाभ बताए जा रहे हैं। सरकार की ओर से मत्स्य पालको के लिए योजनाएं शुरू की गई हैं। उन योजनाओं का लाभ लेने के लिए शनिवार से आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए विभाग में संपर्क कर सकते हैं।
....संतोष कुमार, जिला मत्स्य अधिकारी, बिजनौर