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Bijnor News: झारखंडी स्वयंभू सिद्धपीठ पर होती हैं मनोकामनाएं पूरी

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हल्दौर के गांव शफीपुर नंगली के जंगल में स्थित मनोकामना झारखंडी स्वयंभू सिद्धपीठ मंदिर का ​शिवलि
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-शफीपुर नंगली के जंगल में स्थित है मंदिर
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-500 साल पुराना बताया जाता है मंदिर का इतिहास

हल्दौर। गांव शफीपुर नंगली के जंगल में स्थित करीब पांच सौ वर्ष पुराना मनोकामना झारखंडी स्वयंभू सिद्धपीठ मंदिर लोगों की आस्था का प्रतीक बना हुआ है। भक्तों की ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से की गई पूजा- अर्चना से मनोकामना पूर्ण होती है।
गांव शफीपुर नंगली में करीब पांच सौ वर्ष पुराना मनोकामना झारखंडी स्वयंभू सिद्धपीठ मंदिर स्थित है। बाबूराम सिंह, सतपाल सिंह, सुशील कुमार, दुष्यंत सिंह, डॉक्टर गजराज सिंह, जयप्रकाश सिंह, सुधीर कुमार आदि ग्रामीणों का कहना है कि पूर्वजों के अनुसार एक गैर संप्रदाय किसान के खेत से करीब पांच सौ वर्ष पूर्व शिवलिंग स्वयं भूमि से प्रकट हुए। किसान ने शिवलिंग को अपने खेत से निकालने के लिए उसकी खुदाई करवाकर उसे हटवाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। उक्त किसान ने शिवलिंग को हटाने के लिए कुछ मजदूरों से उसे कुल्हाड़ी एवं हथौड़े आदि से तुड़वाने का प्रयास किया, लेकिन उसमें भी उसे कामयाबी न मिल सकीं।
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इसके बाद उन्होंने शिवलिंग के समक्ष नतमस्तक होकर क्षमा मांगी। स्वयंभू बाबा महादेव के शिवलिंग में आज भी करीब एक-एक इंच कुल्हाड़ी के काटने के गहरे निशान बने हुए हैं। काले चमकदार पत्थर के रूप में सैकड़ों वर्षों बाद आज भी शिवलिंग आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में आसपास क्षेत्र के लोग पूजा-अर्चना करते हैं।
शिवरात्रि पर गंगाजल चढ़ाने आते हैं श्रद्धालु
-वयोवृद्ध दयावती के अनुसार कि सावन मास और शिवरात्रि के पर्व पर श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लाकर मंदिर में पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक करते है और परिवार की मंगलकामना करते हैं। वर्तमान में भी मंदिर के शिवलिंग की ऊंचाई एवं मोटाई प्राचीन काल के अनुरूप है।
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जल चढ़ाने और पूजा-अर्चना से खुश होते हैं बाबा
वयोवृद्ध टीकम सिंह के अनुसार मंदिर में सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। भक्तों द्वारा मंदिर में भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर के महंत भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि मंदिर में भगवान शिव की प्रतिदिन सुबह एवं शाम आरती की जाती है। नव दंपती सर्वप्रथम मंदिर में जाकर भगवान महादेव के समक्ष माथा टेककर अपने उज्ज्वल वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं।
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