जरूरत पड़ी तो पता नहीं चलेंगे भी या नहीं वेंटिलेटर
बिजनौर। कोरोना से बचाव के तो दावे स्वास्थ्य विभाग कर रहा है, लेकिन हकीकत अलग ही है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिस तरह से व्यवस्थाएं बेपटरी हुई और वेंटिलेटरों की कमी पड़ी थी, उसे देखते हुए जिला अस्पताल को 17 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। विडंबना यह है कि इन्हें आज तक चलाकर ही नहीं देखा गया। कहीं ऐसा न हो कि जब इनकी जरूरत पड़े तो यह चल ही नहीं पाए।
चीन में कोरोना का ओमीक्रोन बीएफ-7 कहर बरपा रहा है। देश में भी इसने दस्तक दे दी है। केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार ने कोरोना गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए हैं। कोरोना के मरीजों के लिए बेड आदि की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए जा रहे हैं। ऐसे में वेंटिलेटर का शुरू नहीं होने से तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बड़ी समस्या है कि इन्हें चलाने के लिए न तो तकनीशियन है और न ही एनेस्थेटिक। यह सभी वेंटिलेटर आने के बाद से ही एक कमरे में बंद रखे हैं। ऐसे मरीज यदि जिला अस्पताल में भर्ती भी होते हैं, जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत होती है तो उन्हें मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया जाता है।
वारंटी भी खत्म हुई
जिला अस्पताल को वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे, उनकी वारंटी खत्म हो चुकी है। मरम्मत की तारीख बची है। यानी यदि इनमें कोई तकनीकी खराबी आई तो अतिरिक्त भार भी विभाग पर ही पड़ेगा।
ऑक्सीजन प्लांट भी चलाकर नहीं देखा
जिला अस्पताल में कोविड व्यवस्थाओं को ठीक करने के लिए सीएमएस ने स्टॉफ को निर्देश दिए हैं। ऑक्सीजन प्लांट चलाने के लिए कहा है। जरूरत नहीं होने की वजह से काफी दिनों से ऑक्सीजन प्लांट को भी नहीं चलाया गया है।
जिले में हुआ टीकाकरण
बिजनौर। 18 साल से ऊपर 26,39,247 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लगाने का लक्ष्य रखा था, जिनमें से 26,77,438 लोगों ने पहली डोज लगवा ली है। 25,22,771 लोगों ने वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाई है।
इसके अलावा 12 से 14 उम्र के 1,55,999 किशोरों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा था। जिनमें से 1,62,048 को पहली डोज और 1,56,073 लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगी है। 15 से 17 उम्र वाले 2,58,290 किशोरों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया था। जिनमें से 2,63,695 ने पहली डोज और 2,37,617 ने वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाई है। संवाद
कोरोना से बचाव के लिए जिला अस्पताल में सब सुविधाएं उपलब्ध हैं। वेंटिलेटर भी हैं, जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में बेड की व्यवस्था भी है। एनेस्थेटिक नहीं होने से वेंटिलेटर चलाने में परेशानी आ रही है
- डॉ. मनोज सैन, सीएमएस, जिला अस्पताल