आबादी में वन्यजीव, जंगल में घुसे भूमाफिया
बिजनौर। एक ओर लोग शोर मचा रहे हैं कि गुलदार, हाथी जैसे वन्य जीव आबादी में आ रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर भूमाफिया जंगल में घुस गए हैं। ऐसे में वन्यजीव और इंसानी संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। हस्तिनापुर सेंक्चुअरी के नोटिफिकेशन के दौरान वन विभाग ने रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि बिजनौर वन डिविजन में 754 हेक्टेयर (नौ हजार बीघा) वनभूमि पर अवैध कब्जे हैं। इसमें सबसे ज्यादा अवैध कब्जे अमानगढ़ वन रेंज में हैं। यही नहीं इनमें से कई मामलों में कब्जा करने वाले लोग वन विभाग से कोर्ट केस भी लड़ रहे हैं। ऐसे में वन विभाग इस जमीन को केवल कागजों में ही अपनी बता पा रहा है, मौके पर इस पर अवैध तरीके से खेती कर रहे हैं।
बिजनौर वन डिविजन में छह वन रेंज हैं। इनमें अमानगढ़ वन रेंज सबसे बड़ी है। वन विभाग के बाद बिजनौर वन डिविजन में 14 हजार 415 हेक्टेयर रकबा है। इसमें अकेली अमानगढ़ वन रेंज के पास 9 हजार 542 हेक्टेयर वन भूमि है। इतनी वन भूमि होने के बावजूद भी वन्य जीवों और इंसानों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि वन भूमि के एक बड़े हिस्से पर अवैध कब्जे हो गए हैं। वहां खेती की जा रही है। ऐसे में उस क्षेत्र में घूमने वाले वन्य जीवों के लिए क्षेत्र सिकुड़ता जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण वन भूमि पर लगातार हो रहे अवैध कब्जों को भी माना जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिजनौर वन डिविजन में 754 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। पिछले एक सप्ताह में हल्दौर थाना क्षेत्र के ग्राम गंगोड़ाजट में ही एक गुलदार की जाल में फंसाकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा चांदपुर क्षेत्र में भी एक गुलदार मृत अवस्था में खेत में मिला था। उसके सिर पर भी चोट के निशान थे। घटते जंगल के कारण वन्य जीवों के आबादी में आने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
इन रेंज में है अवैध कब्जे
वन भूमि पर अवैध कब्जों की बात करें तो बिजनौर वन डिविजन में बिजनौर वन रेंज में 180 हेक्टेयर (2160 बीघा), चांदपुर वन रेंज में 22 हेक्टेयर (264 बीघा), अमानगढ़ वन रेंज में 552 हेक्टेयर (6624 बीघा) जमीन पर अतिक्रमण है। वन अफसरों की माने तो इन तीनों रेंज में ही यह अवैध कब्जे हैं, जिसे खाली कराने के लिए वन विभाग सालों से प्रयास तो कर रहा है, लेकिन आज तक खाली नहीं करा पाया। इनमें कई मामले तो ऐसे हैं, जिसमें फर्जी बैनामे तक कर दिए गए हैं। ऐसे ही लोग वन विभाग के साथ कोर्ट में केस लड़ रहे हैं।
---------
हमारे पास जो रिकॉर्ड मौजूद है, उसके मुताबिक बिजनौर वन डिविजन में 754 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण है। इसमें अधिकांश जमीन पर खेती हो रही है और कई मामलों में वन विभाग कब्जा करने वालों से कोर्ट में केस लड़ रहा है। इन जमीनों से कब्जा हटवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
- अनिल पटेल, डीएफओ बिजनौर