बिजनौर के धामपुर में सैयद मसूद गाजी रहमुतल्ला अलैही बाबा बाले सलार की याद में चलने वाले मेला नेजा में दूसरे दिन कव्वाली मुकाबले का आयोजन किया गया।
बाहर से आए मशहूर व मारुफ कव्वालों ने अपने देशभक्ति से ओतप्रोत कव्वालियों को सुनाकर देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा। महिला और पुरुष कव्वाल ने एक दूसरे पर जमकर कटाक्ष करते हुए श्रोताओं की वाहवाही लूटते हुए खूब दाद बटोरी।
मोहल्ला पहाड़ी दरवाजा में चल रहे कव्वाली मुकाबले का उद्घाटन दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि पीस पार्टी के जिलाध्यक्ष इफ्तेखार जैदी ने किया। कव्वाली मुकाबले का आगाज कव्वाल नौशाद साबरी ने सूरज के पलटने में कुछ देर नहीं लगती, पर्वत के फिसलने में कुछ देर नहीं लगती, मजदूर के बच्चों को देखो ना हिकारत से, तकदीर बदलने में कुछ देर नहीं लगती से किया..।
उन्होंने कहा कि बा वक्तेशाम सूरज में हुकूमत छीन लेता है, सहर होते ही तारों से कयादत छीन लेता है, कि सलीका सीख लो उसकी जमीं पे चलने फिरने का, तकब्बुर करने वालों से वो इज्जत छीन लेता है....।
जवाब में महिला कव्वाला रुखसार साबरी सहारनुपरी ने नाते पाक पेश कर कहा कि मुझे छेड़े ना जमाना मैं हूं नबी की दीवानी, मेरी नस-नस बोले नबी-नबी। अता करता है वो रोजी भी बेशक वो अपने बंदों को, खुदा उस घर में रहमत के फरिश्ते भेज देता है।
बिना जलाए चरागों में रोशनी कर दे, ये उसकी मर्जी है वो चाहे तो मौज भी कर दे। कव्वाली मुकाबले का देर रात तक श्रोताओं ने जमकर लुत्फ उठाते हुए कव्वालों के कलाम पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहटों के बीच खूब दाद देकर हौसलाअफजाई की।
कार्यक्रम की सफलता में मेला नेजा कमेटी के अध्यक्ष विकार अहमद, उपाध्यक्ष चंदन चौधरी, गुड्डू भाई, मोहम्मद नाजिर, फरीद अहमद डॉन, मंसूर अली, इरफान मंसूरी, अशरफ अली, डा. मरगूबुर्रहमान, चौधरी बिटटन, आशू चौधरी, बब्बू भाई आदि का योगदान रहा।