हंगामा करते राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ता।
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बिजनौर में पिछले साल का भुगतान न करने पर वेव ग्रुप के एमडी व चेयरमैन के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी गई है। प्रशासन ने वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर मिल के अलावा बरकातपुर चीनी मिल की चीनी व शीरे को भी अभिरक्षा में ले लिया है। बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल के जीएम ने भी इस्तीफा दे दिया है।
मंगलवार को पुराने गन्ना बकाया को लेकर कलक्ट्रेट में बहुत हंगामा हुआ। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले किसानों के आंदोलन के दौरान ही चांदपुर मिल के जीएम तेजवीर सिंह ढाका ने इस्तीफे की घोषणा कर दी थी। किसानों ने बिजनौर मिल के जीएम इसरार अहमद व चांदपुर मिल के जीएम तेजवीर सिंह ढाका को हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया। इस मामले में दोनों अधिकारियों ने मिल में जाने के बाद अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं प्रशासन ने बिजनौर, चांदपुर व बरकातपुर मिल के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए तीनों चीनी मिल की चीनी व शीरे को अपनी अभिरक्षा में ले लिया है।
तीनों चीनी मिलों द्वारा नए पेराई सत्र का कम भुगतान किया है। ऐसा करने पर प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है। बाकी चीनी मिलों को भी समय से भुगतान करने की सख्त चेतावनी दी गई है। वेव ग्रुप के एमडी मनप्रीत सिंह चड्ढ़ा व चेयरमैन राजेंद्र सिंह चड्ढ़ा के खिलाफ भी पिछले पेराई सत्र का भुगतान न करने पर पुलिस में तहरीर दी गई है। बिजनौर चीनी मिल के जीएम इसरार अहमद ने बताया कि वे किसानों का बहुत सम्मान करते हैं। प्रशासन के सुरक्षा के आश्वासन पर वे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की पंचायत में गए थे। वहां पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया और थाने में पुलिस कस्टडी में रखा गया। वे भुगतान कराने का भी पूरा प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वे इस तरह का अपमान नहीं सह सकते हैं। उन्होंने व चांदपुर मिल के जीएम तेजवीर सिंह ढाका ने इस्तीफा दे दिया है।
किसानों को मनाने की कोशिश नाकाम
बिजनौर में भुगतान न करने के कारण बिजनौर चीनी मिल के जीएम इसरार अहमद और चांदपुर के जीएम तेजवीर सिंह ढाका को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में छोड़ दिया। इसका पता चलने पर किसानों में रोष फैल गया। प्रदेश महासचिव कैलाश लांबा, जिलाध्यक्ष विनोद कुमार को सीओ सिटी महेश कुमार ने वार्ता के लिए थाने बुलाया। दोनों मिल के जीएम भी तब थाने में ही थे। कैलाश लांबा के अनुसार पुलिस अधिकारी भुगतान का आश्वासन देकर दोनों जीएम को छोड़ने के लिए किसानों को मना रहे थे। इसके लिए कागज पर लिखकर देने को भी तैयार थे, लेकिन इस पर किसान राजी नहीं हुए।