गांव में नहीं घुसने देंगे पानी के टैंकर
बिजनौर। गंज में खेतों में डाले जा रहे कारखानों के गंदे पानी को लेकर युवा संगठित हुए हैं। उन्होंने किसी भी कीमत पर ठेकेदारों के टैंकरों को गांवों में न घुसने देने का एलान किया है। युवाओं ने किसानों को भी गंदे पानी के लिए जागरूक करने का निर्णय लिया है।
गंज के खेतों में कारखानों के गंदा पानी डाला जा रहा है। अमर उजाला ने यह खबर प्रकाशित की तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची। टीम को किसानों ने बताया कि किसान खेतों में कारखानों का पानी नहीं डलवा रहे हैं। ठेकेदार के आदमी रात को आकर खेतों में पानी डाल जाते हैं। इस संबंध में युवाओं ने जागरूकता फैलाने का निर्णय लिया है। किसान स्वाति सिंह का कहना है कि बिना जांच के खेतों में जहरीला पानी डाला जा रहा है। यह खेतों, पशुओं और इंसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। किसान विशाल लांबा का कहना है कि किसानों को त्वरित लालच में खेतों में ऐसे पदार्थ नहीं डलवाने चाहिए। कहा कि खेतों में चुपचाप पानी डालने वाले ठेकेदारों के लोगों को भी सबक सिखाया जाएगा। ऐसे लोगों को बंधक बनाया जाएगा।
यू ट्यूबर आशीष लांबा का कहना है कि किसानों को जैविक खेती से जुड़ना चाहिए। अगर कारखानों का पानी फायदेमंद होता है तो कारखानों के मालिक अपने और अपने रिश्तेदारों के खेतों में गंदा पानी क्यों नहीं डलवाते हैं। आशीष चौधरी का कहना है कि आसपास के सभी गांवों को किसानों कारखानों के गंदे पानी के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। ऐसा पानी खेतों की फसलों तक को जला देता है और ये बात आसपास के गांव वाले भी जानते हैं। खाद बीज विक्रेता राजीव कुमार का कहना है कि फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए काफी उर्वरक हैं। इनमें कई जैविक भी हैं। ये खेतों को नुकसान भी नहीं पहुंचाते हैं। किसानों को खेतों में कारखानों के गंदे पानी के बजाए उर्वरकों के प्रयोग के लिए जागरूक किया जाएगा।