बिजनौर में हर साल बरसात में मालन नदी की तेज धार दर्जनों गांव की उम्मीदों के पुल को बहाकर ले जाती है। मालन के शांत होने पर फिर से चंदा इकट्ठा कर अस्थाई पुल तैयार करते हैं। साल दर साल यही कहानी चली आ रही है। वहीं 25 दिन पहले भी गांव वालों ने सहयोग कर अस्थाई पुल बनाया जो टूट चुका है। फिलहाल मालन में तेज बहाव चल रहा है, ऐसे में भी ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। इसके अलावा इनके पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है।
नांगलसोती क्षेत्र के पूंडरीकलां-बरमपुर संपर्क मार्ग से पूंडरी खुर्द, बरकातपुर, सबलपुर बीतरा, रायपुर, ताहरपुर, बूढ़पुर, पाडली, नयागांव, भोजपुर, खेड़ी, सीकरी, लच्छीरामपुर, शाहपुर आदि गांवों से बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। ग्रामीण पूर्व प्रधान सुबोध राजपूत, मगनेश, हिमांशु, रोहिताश, सागर सिंह, दुष्यंत, अरुण कुमार का कहना है कि पिछले पेराई सत्र में बरकातपुर शुगर मिल के सहयोग से ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित कर आवाजाही के लिए मालन नदी पर अस्थायी पुल बनाया था, जो दो जुुलाई को नदी के तेज बहाव में बह गया। नदी पर पुल नहीं होने और बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर मार्ग पर आवागमन ठप हो जाता है।
वहीं ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी के चार फीट पानी से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मालन नदी पर पुल बनाने की मांग की है। पूंडरीकलां निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि मालन नदी को पार करना जोखिम भरा है, लेकिन पशुओं के चारे के लिए ग्रामीणों को नदी पार जाना पड़ता है।