समय प्रबंधन और नियमित अभ्यास जरूरी
बिजनौर। बोर्ड की परीक्षाएं करीब आ गई हैं। विद्यार्थी भी परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। शिक्षाविदों का मानना है करीब दो माह की इस अवधि में समय प्रबंधन कर चरणबद्ध नियमित पढ़ाई करके अच्छे नंबर लाए जा सकते हैं।
यूपी बोर्ड, सीबीएसई तथा आईसीएसई की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं अप्रैल के अंतिम सप्ताह व मई के प्रथम सप्ताह से शुरू हैं। विद्यार्थियों के पास परीक्षा की तैयारी करने का करीब दो माह का समय है। कोरोना के कारण करीब सात महीने स्कूल बंद रहे। इस दौरान सीबीएसई व आईसीएसई की आनलाइन पढ़ाई हुई। परंतु यूपी बोर्ड के आधे से कम छात्र ही आनलाइन पढ़ाई से जुड़ सके। विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे अंक लाने की चिंता है। विवेक कॉलेज ऑफ लॉ में मनोविज्ञान विषय की असिस्टेंट प्रोफेसर पुष्पा जोशी के अनुसार इसके लिए अभिभावकों को बच्चों के साथ टेबल टॉक करने, बच्चों में पढ़ाई के साथ साथ फील्ड के खेलों में रुचि पैदा करने व छात्र के खान पान पर ध्यान रखने की जरूरत है। डीआईओएस राजेश कुमार का कहना है कि विद्यालयों को 20 फरवरी तक हाईस्कूल तथा इंटर का पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। विद्यालयों को प्री बोर्ड परीक्षा कराने के निर्देश भेजे गए हैं।
परीक्षा में अच्छे अंक लाने के बारे में डीआईओएस प्रतिनिधि तथा जीआईसी के प्रधानाचार्य निशांत कुमार यादव, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नूरपुर के गणित प्रवक्ता भूपेंद्र शर्मा, जीआईसी बिजनौर के विज्ञान शिक्षक आदि ने विद्यार्थियों को टिप्स दिए हैं।
मार्च में यह करें विद्यार्थी
सभी बोर्ड ने पाठ्यक्रम कम कर दिया है। छात्र हर विषय के कोर्स से हटाए गए चैप्टर की जानकारी लें। कोर्स में जो चैप्टर अन टच अर्थात जो अभी तक बिल्कुल नहीं देखे हैं, उन पर फोकस करें। हर विषय के हर चैप्टर की किताब में दी गई समस्याएं हल करें। पूरे पाठ्यक्रम को दोहराएं। एनसीईआरटी की किताब में दिए गए exercise questions अर्थात अभ्यास प्रश्नों को हल करें। समस्या होने पर विषय शिक्षक से संपर्क करें।
अप्रैल में यह करें छात्र-छात्राएं
अप्रैल के आखिरी सप्ताह या मई के पहले सप्ताह में परीक्षा हैं। इसलिए एकाग्रता बनाकर तैयारी करें। अप्रैल में हर विषय की अधिक से अधिक प्रेक्टिस करें। अच्छा यही होगा कि अप्रैल महीने में किसी नए टॉपिक की शुरुआत न करें। पिछले चैप्टरों को ही दोहराएं। अप्रैल में बोर्ड के पिछले वर्षों के पेपरों को अच्छी तरह हल करें। सभी बोर्ड ने विद्यालयों को मॉडल पेपर भेजे हैं। अपने विषय अध्यापक से या प्रधानाचार्य से इन्हें लेकर हल करें।