जिले के दो छात्र घर लौटे, बाकी कर रहे संघर्ष
बिजनौर। जिले के दो छात्र यूक्रेन से घर लौट आए हैं। बाकी छात्र भी वहां संघर्ष कर रहे हैं। इनमें पंद्रह से अधिक छात्र रोमानिया में दाखिल हो गए हैं, जोकि शेल्टर होम में ठहरे हुए हैं और फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि अभी कई छात्र-छात्राएं यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं। यूक्रेन में फंसे छात्रों को वापस लाने के लिए अभिभावक सरकार से जल्द कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। यूक्रेन में जिले के पचास से अधिक छात्र-छात्राएं मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए गए हुए थे।
सोमवार सुबह सात बजे यूक्रेन के इवानों शहर में फंसा हुआ मुकीमपुर धर्मसी उर्फ खेड़ा निवासी राजेंद्र सिंह का बेेटा पंकज अपने घर लौट आया। पंकज ने बताया कि वह इवानों शहर से रोमानिया के लिए 25 फरवरी की शाम छह बजे बस से चला था। 26 फरवरी को सुबह आठ बजे रोमानिया बॉर्डर पहुंचा। जहां भारतीय दूतावास ने उनकी मदद कर रोमानिया एयरपोर्ट पहुंचाया। 27 फरवरी को सवेरे पांच बजे उनका विमान दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। जहां उत्तर प्रदेश के अधिकारी मिले, वे उसे यूपी भवन ले गए। जहां उनके खाने पीने की व्यवस्था कर उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें सरकारी गाड़ी से गांव पहुंचाया। पंकज ने बताया कि सबसे बड़ी परेशानी बॉर्डर पार करने में हुई। कड़ाके की ठंड में उन्होंने खुले आसमान के नीचे आठ से दस घंटे बिताए। उनका 84 छात्रों का जत्था था। युद्ध शुरू होने पर जान बचाने के लिए घर की याद आती थी। पंकज 2017 में यूक्रेन में एमबीबीएस करने गया था, जहां उसका पांचवां साल था।
पंकज बताते हैं कि अगर हालात सुधरे तो यूक्रेन सरकार उन्हें फिर से बुलाएगी। यूक्रेन से छात्र अपना सामान भी नहीं लाए हैं, जो कपड़े पहने थे उनमें ही वह अपने घर आए हैं। बमबारी होते ही सभी छात्र भागने की कोशिश करने लगे थे। पंकज दो बहनों का इकलौता भाई है। घर में उनके माता-पिता हैं। पंकज के घर आने से परिवार में खुशी का माहौल है। वहीं गजरौला शिव निवासी मोहम्मद अकमल पुत्र नूर अहमद यूक्रेन के खारकीव के बंकर में भारतीय छात्रों के साथ फंसा हुआ है।
घर लौटे आमिर ने जताया सरकार का आभार
अफजलगढ़। गांव रसूलपुर निवासी आमिर पुत्र नाजीर यूक्रेन से घर लौट आया। उसने कहा कि वहां के हालात बिल्कुल भी अच्छे नहीं हैं। उन्हें वहां खाने पीने की परेशानी हो रही थी। यूक्रेन से वह किसी तरह बस में सवार होकर हंगरी पहुंचे। वहां से एयर इंडिया के विमान से वह दिल्ली आया। आने का खर्च भारत सरकार ने स्वयं वहन किया है। अपने घर सकुशल लौटने पर उन्होंने सरकार सहित ईश्वर का शुक्रिया अदा किया।
बॉर्डर पार करने में लग गए 16 घंटे, सूज गए पैर
बिजनौर। यूक्रेन से रोमानिया में दाखिल होने में ही 16 घंटे लग गए। बर्फ के बीच इतना समय धक्का मुक्की में ही बीता। पैर भी सूज गए हैं। यह आपबीती जिले के छात्र हितेश ने रोमानिया में पहुंचकर बताई। कहा कि अब भरपेट खाना मिला है। हालांकि उसके कई साथी अभी तक बॉर्डर पर रोमानिया में दाखिल होने को जद्दोजहद में लगे हैं। रविवार की शाम से हितेश रोमानिया में एयरपोर्ट के पास बने शेल्टर होम में ठहरा हुआ है। जिसे आज फ्लाइट मिलने की उम्मीद है। हितेश ने बताया कि इवानो से निकलने के बाद बॉर्डर पहुंचने में नौ किलोमीटर पैदल चलना पड़ा है। उसके साथ बिजनौर का ही जुबैर भी है।
48 घंटे बाद मिला खाना
बिजनौर। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए छात्रों ने छोटी उम्र में ही जंग की विभीषिका देख ली है। यह बात नजीबाबाद के रहने वाले मोबिन हसन ने कही। मोबिन हसन ने बताया कि उनका बेटा माज हसन 18 साल की उम्र में तमाम दिक्कतों को झेलकर वतन वापस आ रहा है। बॉर्डर पर 24 घंटे से अधिक का समय खुले आसमान के नीचे बिताया। पैदल चले, खाना नहीं मिला। जीरो से नीचे तापमान को झेला। उन्होंने बताया कि बेटे से बात हुई है, जिसने बताया कि 48 घंटे बाद खाना मिला है। रोमानिया में पहुंचने पर सुकून मिला। रोमानिया में रहने वाले भारतीय मूल के परिवार छात्र-छात्राओं की मदद को आगे आ गए हैं।
हंगरी पहुंचा विपिन, अफ्फान, सनाउर्रहमान पहुंचे रोमानिया
गजरौला शिव/धामपुर। स्वाहेड़ी बुजुर्ग निवासी विपिन विश्वकर्मा 18 छात्रों के साथ यूक्रेन से निकलकर से हंगरी पहुंच गया है। हंगरी के बुद्धा पेस्ट एयरपोर्ट से उन्हें भारतीय दूतावास घर भेजने की व्यवस्था में जुटे हुए हैं। बताया कि 27 फरवरी को रात 11:00 बजे यूक्रेन छोड़ दिया है। सहसपुर निवासी याबर ने बताया कि उसका भाई यासर और उनके गांव का अफ्फान यूक्रेन में फंसा था। सोमवार को जब उनकी फोन पर बात हुई तो दोनों ने बताया कि वह बहुत ही परेशान हैं। यूक्रेन सीमा से पहले वहां पर फोर्स की ओर से उनके ऊपर लाठी चार्ज कर दौड़ाया गया। वह किसी तरह से सोमवार को यूक्रेन सीमा से बाहर निकल कर रोमानिया पहुंचे हैं। रोमानिया में आकर उन्हें खाना मिला। शेरकोट निवासी अताउर्रहमान ने बताया कि उनकी अपने पुत्र सनाउर्रहमान से फोन पर बात हुई। वह यूक्रेन से रोमानिया बॉर्डर पहुंच चुके हैं। वहीं, शेरकोट के अन्य छात्रों का एक दल जो रविवार को मालदोवा पहुंच चुका था। सोमवार सुबह सभी रोमानिया बॉर्डर पहुंचेंगे। अभी शेरकोट के छह छात्र यूक्रेन में फंसे हैं।