- समरकली और गोपाल की हत्या के मामले में चार आरोपी बरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। विशेष न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार ने समरकली और गोपाल की हत्या के मामले में अपराध सिद्ध नहीं होने पर चार आरोपियों गौरव, नरेंद्र, अरुण, मंगत सिंह को बरी कर दिया है। उनमें से दो नरेंद्र और गौरव को अवैध हथियार रखने का दोषी पाते हुए नरेंद्र व गौरव को तीन-तीन साल के कारावास व 500-500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एडीजीसी अजीत पंवार के अनुसार नीरज ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह सदुपुरा गांव का रहने वाला है। हम चार भाई व एक बहन है। वह दिव्यांग है। नीरज की बहन से गौरव ने संबंध बना लिए थे। कोर्ट मैरिज करना चाहता था। जिसका नीरज का परिवार विरोध करता था। एक दिन गौरव रात्रि में दीवार कूदकर मेरी बहन के पास पहुंच गया। नीरज को धमकाकर चला गया। इस घटना के बारे में नीरज ने अपनी मां समरकली और पिता गोपाल को बताया। पंचायत में समझौता हो गया। तय हो गया कि गौरव अब उनके घर नहीं आएगा। 14 सितंबर की शाम सात बजे नीरज की बहन को गौरव ले गया।
उसकी मां समरकली, पिता गोपाल सिंह गौरव के घर कहने के लिए गए तो नरेंद्र, अरुण, मंगत आग-बबूला हो गए। अपने हाथों में छूरी लेकर आ गए। समरकली और गोपाल पर हमला कर दिया। नीरज अपने माता-पिता को बचाने अपने भाई भूरे के साथ गया तो उन लोगों पर चाकू से हमला किया। इस घटना में माता-पिता की मृत्यु हो गई। पुलिस ने गौरव और नरेंद्र की निशांदेही पर छूरी बरामद की थी।
पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड में गौरव, नरेंद्र, अरुण और मंगत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में प्रमुख गवाह नीरज, भूरे, चुटेल राखी पक्षद्रोही हो गए। उन्होंने हमलावरों को नहीं पहचान पाने की बात कही। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोष सिद्ध नहीं होने पर गौरव, नरेंद्र, अरुण, मंगत सिंह को हत्या व जानलेवा हमले के मामले में दोष मुक्त कर दिया है। अवैध छुरी रखने में दोषी पाते हुए नरेंद्र और गौरव को सजा सुनाई है।