राजा का ताजपुर में ग्राम रवाना और ताजपुर में फैले वायरल बुखार से मंगलवार को दोनों गांवों में एक-एक महिला की मौत हो गई। दोनों गांवों में अब तक बुखार से मरने वालों की संख्या 33 हो गई है। इतनी संख्या में मौतें होने के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग लापरवाही बरत रहा है। इसको लेकर ग्रामवासियों में रोष है।
ताजपुर निवासी मुन्नी देवी (55) पत्नी शादीराम पिछले पांच दिनों से बुखार से पीड़ित थी। उसका बिजनौर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। सोमवार की रात उसकी मौत हो गई। उधर, रवाना निवासी रहमत खातून (50) पत्नी शराफत हुसैन की भी सोमवार की रात मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक वह पिछले चार दिन से बुखार की चपेट में थी। एक ही दिन में बुखार के कारण हुई दो मौत से ग्रामीण बुरी तरह से भयभीत हैं। रवाना में पिछले डेढ़ माह में बुखार से 24 जबकि ताजपुर में नौ ग्रामीणों की बुखार से मौत हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार दोनो गांवों में अभी भी बुखार से सैकड़ों लोग पीड़ित हैं। नरेंद्र सिंह, मुन्ने सिंह, बलराम, सतेंद्र, निजाम अहमद आदि का कहना है कि ताजपुर पीएचसी पर किसी चिकित्सक की तैनाती न होने के कारण बुखार से पीड़ित निजी चिकित्सकों के यहां अपना इलाज करा रहे हैं। रवाना व ताजपुर में बुखार से 33 मौतें होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग लापरवाही बरत रहा है। 30 हजार की आबादी वाले राजा का ताजपुर में मात्र एक बार ही फॉगिंग कराई गई है। इसके अलावा न तो गांव में कोई कैंप लगाया गया और न ही किसी अधिकारी ने बुखार पीड़ितों का हाल जानने की कोशिश की। ग्राम प्रधान सुरेश सैनी ने ताजपुर में फॉगिंग कराने की मांग की है।
उधर, बिजनौर में जिले में एक और चिकनगुनिया का मरीज मिला है। किरतपुर के गांव शादीपुर निवासी सुभाष सोलियान की पुत्री निक्की सोलियान कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। उसे करीब एक सप्ताह पहले तेज बुखार आया था। इसके बाद जोड़ो व सिर में दर्द शुरू हो गया। उनका इलाज एक निजी चिकित्सक के यहां चल रहा था। जांच में उसे चिकनगुनिया से पीड़ित बताया गया। जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ फिजिशियन डा.योगेंद्र तिरखा का कहना है कि चिकनगुनिया भी एक तरह का वायरल फीवर है। मरीजों को पेय पदार्थों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए।
उधर, विवेक कालेज में डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल जैसे बुखार से बचाव के लिए निशुल्क दवाओं का वितरण किया जा रहा है। और रोगों से बचने के टिपस भी दिए जा रहे है। कालेज के चेयरमैन अमित गोयल ने बताया कि अधिकतर दवाएं जड़ी बूटी के साथ आयुर्वेदिक हैं। उन्हाेंने बताया कि बुखार के प्रकोप को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
वहीं धामपुर में धामपुर एवं अफजलगढ़ ब्लॉक के प्राइमरी और उच्च प्राईमरी विद्यालय के शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को मच्छरों से बचाने के लिए कीटनाशक के छिड़काव की मांग की है। स्कूलों की ओर से कहा गया है कि मच्छरों के कारण विद्यार्थी बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। गांव पुराना धामपुर, नींदड़ू, हसनपुर, सुआवाला, रेहड़, भगतावाला, कासमपुरगढ़ी और नगर क्षेत्र के विद्यालयों के शिक्षक परवीन सिंह, दिलावर सिंह, पवन कुमार, गजेंद्र सिंह, बबीता, कमला रानी का कहना है कि इस समय पूरा जनपद बुखार की चपेट में है। काफी संख्या में मरीज दम तोड़ चुके हैं। स्कूल के बच्चें भी बुखार के कारण गैरहाजिर हो रहे हैं। बीमार बच्चों के अभिभावकों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। जब बच्चें बीमार हैं तो उनका स्कूल में आना संभव नहीं हो पा रहा है। कई शिक्षक भी डेंगू सहित अन्य बुखार से पीड़ित हैं। शिक्षकों का कहना है कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य विभाग और ग्राम प्रधान का संयुक्त खाता में धनराशि इसलिए भेजी जाती है कि जिससे स्वास्थ्य विभाग ओर ग्राम सभा मिलकर अपनी पंचायत में कीटनाशक का छिड़काव कर जहरीले मच्छरों से लोगों को निजात दिलाएं। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने डीएम से हस्तक्षेप कर दोनों ब्लॉकों के प्रत्येक स्कूलों में कीटनाशक दवाईयों के छिड़काव की मांग की है।