एनएच 74 पर भीषण दुर्घटना के बाद बचाव कार्य के िलए रस्सियों को बांधते लोग।
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बिजनौर में हरिद्वार जाने के लिए निकला लखीमपुर खीरी का टंडन परिवार उस जगह हादसे का शिकार हुआ, जो इनके रास्ते में पड़ता ही नहीं था। धामपुर से इनको हरिद्वार के लिए मुड़ना था, लेकिन यह दूसरी दिशा में शेरकोट व काशीपुर की ओर मुड़ गए और गांव सुहागपुर के सामने उनकी कार सामने से आ रही बस से टकरा गई। नौ लोगों की मौत के बाद जमा हुए लोगों में परिवार के प्रति संवेदना थी तो साथ ही चर्चा भी थी कि काल वहीं खींचकर ले जाता है, जहां मौत लिखी होती है। यही इनके साथ भी हुआ, धामपुर से उस रास्ते पर मुड़ गए, जहां रास्ते में मौत इनका इंतजार कर रही थी।
लखीमपुर खीरी के मोहल्ला कपूरथला के इमली चौराहा निवासी अनिल टंडन के तीन बेटों में राहुल सबसे बड़ा, रजत दूसरे नंबर का व रोहित सबसे छोटा था। लखीमपुर खीरी में टंडन परिवार का मारुति कार का शोरूम और आटा मिल है। शहर के बड़े कारोबारियों में इस परिवार की गिनती होती है। हादसे के वक्त राहुल घर पर ही था, बाकी दोनों भाई परिवार के सदस्यों को लेकर घर से निकले थे। आमने-सामने से जिस तरह दोनों वाहनों में भिड़ंत हुई उससे अनुमान लगाया जा रहा था कि ये लोग हरिद्वार से लौट रहे थे। लेकिन परिवारीजनों के आने के बाद पता चला कि ये लोग हरिद्वार जा रहे थे और बुधवार रात करीब 11 बजे लखीमपुर खीरी से हरिद्वार के लिए चले थे।
लखीमीपुर खीरी से यह मुरादाबाद होते हुए धामपुर पहुंचे। धामपुर से इन्हें हरिद्वार के लिए मुड़ना था लेकिन यह गलत दिशा में मुड़ गए और चार-पांच किलोमीटर गलत दिशा में चले गए। सुबह का समय था और बारिश भी हो रही थी, इसके चलते किसी से रास्ता पता भी नहीं कर पाए होंगे। परिवारीजन उस घड़ी को कोस रहे हैं, जब ये लोग घूमने के लिए घर से निकले थे। राहुल के मुताबिक कई दिनों से हरिद्वार घूमने का कार्यक्रम बन रहा था। हरिद्वार से सब लोग रिश्तेदारी में घूमने देहरादून जाते। बुधवार रात 11 बजे इन्नोवा में सवार होकर परिवार के सभी सदस्य खुशी-खुशी हरिद्वार जाने के लिए निकले थे।