रेलवे रोड पर ट्रक चालकों ने जाने से खड़े किए हाथ
बिजनौर। रेलवे रोड से चीनी, सीमेंट, खाद आदि रैक ले जाने और लाने से ट्रक चालकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। ट्रक चालकों ने इस सड़क पर हो चुके काफी गहरे गड्ढों को इसका मुख्य कारण बताया है। बारिश के बाद तो इसकी हालत और भी ज्यादा खराब हो जाती है। इस कारण इस सड़क पर पैदल चलना तक दूभर हो जाता है। ट्रक चालकों का कहना है कि करीब एक किमी की इस रोड पर चलने से भाड़े से अधिक टूट फूट होती है। इससे उन्हें आर्थिक हानि होती है।
रेलवे स्टेशन के ठीक सामने रेलवे की मुख्य सड़क है। इस सड़क के किनारे पर जीआरपी की आवासीय बैरक भी है। इसी रोड से रोजाना चीनी, सीमेंट, खाद आदि की यहां से जाने वाली रैक मालगाड़ी में लोड की जाती है और बाहर से आने वाली रैक यहां पर उतारी जाती है। इसके बदले में व्यापारियों की ओर से रेलवे को अच्छा खासा भाड़ा दिया जाता है। इसके बावजूद इस रोड की सुध लेने को कोई तैयार नहीं है। बारिश के बाद तो इसकी हालत बद से बदतर हो जाती है। वर्तमान में इस सड़क पर डेढ़ से दो फीट तक के गड्ढे हो चुके हैं और बारिश के बाद अब यह पूरी तरह से कीचड़ के आगोश में समा गई है। इस सड़क को बनवाने के लिए फाटक के आसपास के दुकानदार सहित कई लोग इसे बनवाने की मांग उठा चुके हैं, लेकिन फिर भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ट्रक ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज तुली ने बताया कि ट्रकों में रैक लाने और ले जाने के लिए केवल तीन रुपये के प्रति कट्टे के हिसाब से भुगतान किया जाता है। उन्होंने बताया कि जितना यहां पर काम है उस हिसाब से सुविधा नहीं हैं। इस हिसाब से कुल मिलाकर आठ से नौ हजार रुपये तक का प्रति ट्रक भाड़ा मिलता है और टूट फूट करीब दस से 12 हजार रुपये के आसपास बैठती है। उन्होंने बताया कि जब तक यह सड़क ठीक नहीं करवाई जाएगी तब तक इस रोड पर ट्रक नहीं भेजे जाएंगे।