- मुगलकालीन और ब्रिटिशकालीन पुलों पर सरपट दौड़ रहा ट्रैफिक, मालूम नहीं मियाद
- बिजनौर-बदायूं स्टेट हाईवे में छोइया नदी के पुल में नहीं लगा है सीमेंट और लोहा
- पुल संकरा और बेहद पुराना होने की वजह से पास में ही हो रहा है नए पुल का निर्माण
- बालावाली के पुराने रेल पुल ने भी मियाद पूरी होने के 34 साल बाद तक दी सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। बिजनौर-बदायूं स्टेट हाईवे में छोइया नदी के पुल की मियाद कब पूरी हुई, यह किसी को मालूम नहीं। फिर भी इस पुल पर ट्रैफिक अब तक सरपट दौड़ रहा है। सड़क की चौड़ाई और ट्रैफिक बढ़ने की वजह से यह संकरा नजर आने लगा। इसके बराबर में नया पुल तैयार किया जा रहा है।
साल 2020 में छोइया नदी पर पुल बनाए जाने के लिए तीन करोड़ 75 लाख रुपये का बजट पास हुआ था। 2021 के शुरुआत में ही छोइया नदी पर पुल का निर्माण चालू हुआ। अब स्लैब भी डाल दिए गए हैं। हालांकि निर्माणाधीन पुल को पहुंच मार्ग से जोड़ना बाकी रह गया है।
एतिहासिक होने की वजह से नहीं तोड़ा गया पुल
नया पुल बनाने के लिए बजट जारी हुआ था तो पहले पुराने पुल की जगह पर ही नया पुल बनाने की रुपरेखा बनी। बाद में लोक निर्माण विभाग ने इस पुल को एतिहासिक मानते हुए इसे तोड़ने के बजाए बराबर में ही नया पुल बनाने की ठानी। फिलहाल छोइया नदी के जिस पुल से ट्रैफिक गुजर रहा है, उसे मुगलकालीन बताया जाता है। इस पुल में सीमेंट और लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया था। पुल में डाट बने हुए हैं। क्योंकि ब्रिटिश काल में भी लोहे का इस्तेमाल पुल निर्माण में किया जाता था।
35 साल पहले पूरी हो चुकी है बालावाली पुल की मियाद
ब्रिटिश काल में बने बालावाली के पुल ने अब तक भारी ट्रैफिक का बोझ झेला। हालांकि अब बराबर में नया पुल बनने की वजह से इस साल वाहनों ने पुराने पुल से गुजरना बंद कर दिया है। 1888 में बने इस पुल पर रेल यातायात 23 साल पहले बंद कर दिया गया था। 35 साल पहले मियाद पूरी हुई।
रेलवे ट्रैक उखड़ने के बाद उत्तराखंड ने बनवा दी थी पुल पर सड़क
बालावाली में रेलवे का पुराना पुल है। नया पुल बनाने के बाद रेलवे ने इस पुल से ट्रैक उखाड़ लिया और यूपी सरकार को सौंप दिया। इस पर बाद में उत्तराखंड सरकार ने सड़क बना दी। साल 2000 के बाद इस पुल से रेल के बजाए वाहन निकलने लगे।
रेलवे के दस बड़े पुलों में शामिल था यह ब्रिज
देश में रेलवे के दस बड़े पुल हैं। इनमें बालावाली का पुल भी शामिल था, हालांकि अब यह रेलवे के पास नहीं है। रेलवे ने साल 2000 में नए पुल से ट्रेनों का संचालन चालू कर लिया था। ब्रिटिश काल में जम्मूतवी को कलकत्ता से रेल मार्ग से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर बालावाली में पुल बनाया गया था। इसके निर्माण पर 27.94 लाख रुपये खर्च हुए थे। इस पुल की मियाद पूरी होने की वजह से बनाए गए नए पुल पर तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी ने साल 2000 रेल यातायात का शुभारंभ किया था।