आत्मनिर्भर बनने के लिए लिया था ऋण, अब नहीं दे पा रहे किस्त
अजीत चौधरी
बिजनौर। कोरोना काल में रेहड़ी और फड़ वालों की मदद के लिए सरकार ने उनके खातों में दस-दस हजार रुपये का ऋण दिलाया, लेकिन ये खाते अब एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) हो गए हैं। फड़ व रेहड़ी वाले बैंकों को ऋण की किस्त समय पर नहीं जमा कर रहे हैं। जिले में ऋण लेने वाले नौ हजार खातों में से करीब 40 प्रतिशत खाते एनपीए हो गए हैं। अब सरकार इन लोगों को 20-20 हजार का ऋण देने की योजना बना रही है। जो लोग समय से किस्त जमा करेंगे वे ही इस ऋण का फायदा ले पाएंगे।
पिछले साल कोरोना के समय जनता के काम धंधे बहुत प्रभावित हुए थे। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक मदद के लिए आत्मनिर्भर भारत योजना शुरू की थी। इसमें हर वर्ग के लिए अलग योजना का संचालन किया गया था। शहरों में सड़क किनारे फड़ व रेहड़ी लगाने वालों के लिए भी प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना चलाई थी। योजना में नगर पालिका में पंजीकृत फड़ व रेहड़ी वालों के काम को बढ़ाने के लिए दस-दस हजार रुपये का ऋण दिलाया था।
इस ऋण पर सात प्रतिशत ब्याज की सब्सिडी भी थी। जिले में नौ हजार से अधिक फड़ व रेहड़ी वालों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। इनके खातों में दस-दस हजार रुपये जमा किए गए। इस ऋण को जमा करने के लिए हर महीने 975 रुपये की किस्त निर्धारित की गई। लेकिन अधिकतर रेहड़ी व फड़ वालों ने यह रकम बैंकों में जमा ही नहीं की और इनके खाते एनपीए हो गए। ऐसे उपभोक्ताओं को खाते नियमित न करने यानि पुरानी किस्त जमा न करने तक नई योजना का लाभ नहीं मिलेगा। अब सरकार इन खातों में 20-20 हजार रुपये ऋण देने की तैयारी में है, लेकिन एनपीए वाले उपभोक्ताओं को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। (संवाद)
नगर पालिका लाभार्थी
बिजनौर 845
नगीना 1037
नजीबाबाद 703
चांदपुर 953
शेरकोट 462
किरतपुर 628
धामपुर 431
स्योहारा 771
नहटौर 627
नूरपुर 392
अफजलगढ़ 462
हल्दौर 310
बढ़ापुर 214
सहसपुर 290
साहनपुर 255
मंडावर 262
झालू 287
जलालाबाद 141
कुल 9070
नोट:आंकड़े विभाग भवन से लिए गए हैं।
तीन महीने तक किस्त जमा न करने पर एनपीए होता है खाता
व्यापारियों, उद्यमियों, दुकानदारों को दिए जाने वाला ऋण टर्म लोन कहलाता है। इसकी मासिक किस्त तय होती है। लगातार तीन महीने की किस्त जमा न करने पर खाता एनपीए हो जाता है। एनपीए वाले खाते के नियमित न होने तक उसे किसी तरह का कोई ऋण नहीं दिया जाता है। डूडा के परियोजना अधिकारी नरेंद्र मिश्रा के अनुसार जिन लोगों को योजना का लाभ दिया गया था, उनमें से काफी ने किस्त जमा नहीं की है। अब ऐसे लोगों को अधिक ऋण देने की योजना है। लाभ लेने के लिए पात्रों से बैंक की किस्त अदा करने के लिए कहा जा रहा है।
नहीं लग रहा था ठेला, इसलिए जमा नहीं हुई किस्त
सड़क किनारे सब्जी का ठेला लगाने वाले जहीर ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू और तबीयत खराब होने की वजह से वह काफी दिन ठेला नहीं लगा पाया था। इस वजह से वह किस्त जमा नहीं कर पाया। अब वह अपने खाते को नियमित करेगा।