कालागढ़ के वनों में लैंटाना की झाड़ियों में छिपा बैठा बाघ।
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बिजनौर से सटे कालागढ़ में फायर स्टेशन के ध्वस्तीकरण के बाद मलबे को बाघ ने अपना बसेरा बना लिया है। यहां दिन में ही बाघ नजर आ रहा है। बाघ के इस इलाके में नजर आने से राहगीरों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।
कालागढ़ के वनों में 1973 में कार्बेट टाइगर रिजर्व की स्थापना व बाघ परियोजना के संचालित होने के साथ ही बाघ व बाघिन नजर आना आम बात रही है। राम गंगा बांध परियोजना की केन्द्रीय कॉलोनी व नई कॉलोनी के आवासीय ध्वस्तीकरण के साथ ही यहां बने फायर स्टेशन एवं पेट्रोल पंप को भी ध्वस्त कर दिया गया। इसके साथ ही वनों का विस्तार इन ध्वस्त पड़े मलबे होने लगा।
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वनों के साथ साथ ही यहां वन्यजीव अपना आसरा बनाने लगे। वन्यजीव आबादी के बीचोबीच आने लगे। इन दिनों एक नर बाघ फायर स्टेशन के मलबे के निकट नजर आ रहा है।
राहगीरों सोनू, कमल कुमार, राहुल आदि ने बताया कि यहां दिन में ही बाघ दिखाई दिया। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. धीरज पांडेय ने बताया कि यहां पर गश्ती दल तैनात हैं। फिर भी यहां से गुजरने वालों को सतर्कता बरतनी चाहिए। यह जीव खतरनाक होते हैं। इनके साथ छेड़छाड़ न की जाए।