फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाघों की राजधानी में हाथियों का राज

Fri, 28 Aug 2015 11:15 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
विज्ञापन
विज्ञापन
कालागढ़ (बिजनौर)। बाघों की राजधानी के खिताब के बाद अब कार्बेट टाइगर रिजर्व हाथियों की राजधानी बन गया है। पूरे उत्तराखंड में सबसे अधिक हाथी कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में पाए गए हैं।
विज्ञापन


हाथी गणना के परिणाम घोषित होने के बाद पार्क के  उपनिदेशक डा. साकेत बड़ोला ने कहा कि पार्क में हाथी का संरक्षण व उसकी  सुरक्षा का यह अच्छा परिणाम सामने आया है। इसके लिए यहां चलाई जा रही हाथी परियोजनाएं सार्थक साबित हुई हैं।


कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों का क्षेत्रफल 1288 वर्ग किमी है। इसमें जून के प्रथम सप्ताह में हाथी गणना की  गई थी। यह गणना पूरे उत्तराखंड के वनों में भी की गई थी। जिसका परिणाम वन विभाग ने घोषित किया है। पार्क के उपनिदेशक के अनुसार पूरे उत्तराखंड में 1797 हाथी गिने गए। जबकि अकेले कार्बेट टाइगर रिजर्व में इनकी संख्या 1035 मिली है।
विज्ञापन


परिणाम पार्क के लिए काफी उत्साहजनक और सम्मान पूर्ण हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि कार्बेट टाइगर रिजर्व में हाथी की संख्या बढ़ी है। यहां पहले 743 हाथी की संख्या रिकॉर्ड की गई थी। अब यह आंकड़ा एक हजार को पार कर गया है। इस समय ढिकाला में सबसे अधिक 242, सर्पदूली में 193, कालागढ़, ढेला, झिरना, बिजरानी, सोनानदी आदि में 600 हाथी मौजूद हैं।


वहीं अब कार्बेट टाइगर रिजर्व पर इनकी सुरक्षा व प्राकृतावास को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती भी है। जिसका  जिम्मा वन विभाग के अलावा सभी का है। जनता के सहयोग से सुरक्षा सबसे अच्छी होती है। दुनिया में अफ्रीका व एशियाई हाथी पाए जाते हैं। कार्बेट टाइगर रिजर्व में एशियाई हाथियों के दल मौजूद हैं।  

क्या है सुरक्षा
कार्बेट टाइगर रिजर्व में जहां वनों में लंबी दूरी की गश्त कई रेंज के कर्मी मिल कर करते हैं। वहीं, सीमा पर उत्तर प्रदेश के वन विभाग के कर्मियों की भी संयुक्त गश्त होती है। इसके अलावा ई-सर्विलांस से जंगल के चप्पे चप्पे पर 24 घंटे निगाह रखी जाती है। विभाग के अधिकारी व कर्मी भी अपने अपने इलाके में सशस्त्र गश्त करते रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें