- खेत की निगरानी कर रहे वन विभाग के अधिकारी, लोगों में दहशत व्याप्त
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संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़ (बिजनौर)। नई बस्ती के खेतों में बाघ ने डेरा डाल लिया है, बाघ के खेतों दिखाई देने पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने खेत को घेर रखा है। मौके पर वन विभाग के गश्ती दल नहीं पहुंचे। वन विभाग के अधिकारियों ने बाघ की तलाश में सर्च अभियान चलाया। बाघ के खेत से नहीं निकलने पर वन विभाग ने निगरानी शुरू कर दी है। वहीं, जनता में वन विभाग के प्रति असंतोष फैल रहा है।
पुराना कालागढ़ की नई बस्ती में बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे एक बाघ को लोगों ने गन्ने के खेत की ओर जाते देखा। भीड़ को देखकर बाघ गन्ने के खेत में चला गया। मामला उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की सीमा पर होने की वजह से दोनों ही राज्यों के वन विभाग के गश्ती दल पहुंच गए। भारत सिंह के खेत में एक बाघ को खेत से निकालने के लिए वन विभाग ने सर्च अभियान चला दिया। इस दौरान कई राउंड फायरिंग की गई। ड्रोन से बाघ को तलाशा गया तो वह खेत में नजर आया। वन विभाग ने लगभग दो घंटे तक मशक्कत की, लेकिन बाघ खेत से बाहर नहीं आया। वहीं, कालागढ़ की कार्बेट टाइगर रिजर्व की हाथीशाला से दो हाथी भी तलाशी अभियान के लिए मंगाए गए।
बाघ के खेत से बाहर न निकलने पर अमानगढ़ टाइगर रिजर्व की वनक्षेत्राधिकारी व हाथी वापस चले गए। मौके पर केवल वन कर्मी व पुलिस तैनात है। बाघ को आबादी के बीच खेत से न निकालने पर ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ गुस्सा है। दलपत सिंह, राधेश्याम बंसल, पीतम सिंह, नन्हें सिंह, महेन्द्र सिंह आदि का कहना है कि वन विभाग का यह रवैया उचित नहीं है। शायद वन विभाग को किसी हादसे का इंतजार है।
वनक्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय का कहना है कि बाघ एक निजी खेत में है। उसे निकालने का प्रयास किया गया। हाथी भी आए पर वह नहीं निकला है। दूसरे के क्षेत्र में उसकी अनुमति के बिना हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। बिजनौर के डीएफओ अरुण कुमार सिंह का कहना है कि मामला संज्ञान में है। बाघ की निगरानी की जा रही है। रात में वह अंदर जंगल में चला जाएगा। आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।