कार्बेट के जंगल में विश्राम करता बाघ
- देहरादून सहित आसपास के लिए
- 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने छोड़े थे बाघ के शावक
- कार्बेट टाइगर रिजर्व को माना जाता है देश का सबसे पुराना टाइगर रिजर्व
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़ (बिजनौर)। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर टाइगर रिजर्व में बाघ गणना के मामले में कार्बेट का आंकड़ा देश के सभी टाइगर रिजर्व पर भारी रहा। कार्बेट के वनों में इस समय 260 बाघ मौजूद हैं। कार्बेट में बाघों के संरक्षण की तारीफ से कार्बेट टाइगर रिजर्व व कालागढ़ के जंगलों का कद बढ़ गया है। कार्बेट टाइगर रिजर्व को भारतीय उप महादीप का सबसे पुराना टाइगर रिजर्व माना जाता है। 1973 में देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कालागढ़ के जंगलों में बाघ के शावकों को छोड़कर इसकी बुनियाद रखी थी।
50 वर्ष में कार्बेट टाइगर रिजर्व एवं कालागढ़ टाइगर रिजर्व के वन बाघ के सघन विचरण के क्षेत्र बन गए। बाघ की बढ़ती आबादी ने दुनिया में यहां के जंगलों की पहचान बनाई। वैश्विक व्याघ्र दिवस पर ढिकुली के एक रिजाॅर्ट में केंद्रीय पर्यावरण राज्यमंत्री अश्विनी चौबे व केन्द्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बाघों की गणना के परिणाम की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अकेले कार्बेट पार्क में 260 बाघ हैं। देश में सबसे अधिक बाघों का घनत्व कार्बेट में ही है। वन कर्मियों को सेना व पुलिस की तर्ज पर राष्ट्रपति सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया जाना चाहिए। यहां पर्यटन विकास के लिए प्रयास किए जाऐंगे। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा में अधिक तकनीकी उपाय किए जाने को कहा है।
260 का आंकड़ा सम्मानजनक
कार्बेट टाइगर रिवर्ज के निदेशक डाॅ. धीरज पांडेय का कहना है कि कार्बेट टाइगर रिजर्व को मिले सम्मान से समूचे वन विभाग का कद ऊंचा हुआ है। 260 की संख्या का आंकड़ा सम्मानजनक है। 2018 में यहां 231 एवं 2014 में 215 बाघ मौजूद थे।