- साथियों की मदद लेकर बस में मैनुअल टिकट बना रहे परिचालक
- उत्तर प्रदेश परिवहन की ई-टिकटिंग प्रणाली पर साइबर अटैक से बढ़ी परेशानी
फोटो समाचार
अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। तकनीकी के बदलते दौर में लोगों की याददाश्त कमजोर होने लगी है। पहले मुंह जुबानी लोगों को सैकड़ों माेबाइल नंबर याद होते थे। मगर मोबाइल की लोकप्रियता बढ़ने से मोबाइल नंबर धीरे-धीरे दिमाग से गायब हो गए। ऐसा ही कुछ अब रोडवेज परिचालकों के साथ हो रहा है। टिकट मशीन बंद होने से परिचालक रूट का किराया ही भूल गए। अब वह टिकट बनाने के लिए अपने साथियों की मदद ले रहे हैं।
उत्तर प्रदेश परिवहन की ई-टिकटिंग प्रणाली पर 25 अप्रैल को साइबर अटैक हो गया। जिसकी वजह से सभी टिकट मशीनों का डाटा इनक्रिप्ट हो गया। जिसकी वजह परिचालकों से लेकर कार्यालय तक लिपिकों की परेशानी बढ़ गई है। टिकट मशीन बंद होने से परिचालक यात्रियों का मैनुअल टिकट बना रहे हैं। इससे समय तो खराब हो ही रहा है, साथ ही कुछ लोगों का टिकट भी नहीं बन पा रहा है।
मैनुअल टिकट होने से बस में बैठे यात्रियों का जल्दी टिकट बनता नहीं है कि अगले स्टॉप से और अधिक यात्री में बस में चढ़ जाते हैं। कार्यालय में लिपिकों को अब घंटों मैनुअल टिकट का मिलान करना पड़ रहा है। पहले एक क्लिक पर टिकट मशीन का पूरी जानकारी मिल जाती थी। (संवाद)
मैनुअल टिकट गिनने के लिए बढ़ाई लिपिकों की संख्या-
टिकट मशीन बंद होने से बिजनौर डिपो कार्यालय में चार लिपिकों की संख्या बढ़ा दी गई। क्योंकि मैनुअल टिकट गिनने में समय लगता है। एक परिचालक के टिकट गिनने में घंटों का समय लग रहा है। जिसकी वजह से कार्यालय में भी टिकट का हिसाब देने वाले परिचालकों की लंबी लाइन लग रही है।
रोडवेज पर यात्रियों की भारी भीड़
ईद के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। ईद से पहले रोजाना करीब 19 हजार यात्री सफर करते थे। मगर अब रोडवेज बसों में यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ गई है। बुधवार को करीब 23 हजार यात्रियों ने बिजनौर डिपो की बसों में सफर किया। वहीं, मैनुअल टिकट की वजह से डिपो पर बाहर की कम गाड़ियां आ रही हैं। जिसकी वजह से बस अड्डे पर यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
टिकट बनाने में आ रही दिक्कत : मनीष चौहान
परिचालक मनीष चौहान ने बताया कि टिकट मशीन बंद होने से टिकट बनाने में काफी परेशानी आ रही है। मशीन में कोड डालते ही टिकट बन जाता था। जिससे उन्हें किराया भी याद नहीं है। साथियों से किराया पूछकर टिकट बनाना पड़ रहा है। ज्यादातर परिचालकों के साथ यही समस्या है। लिपिक धीरेंद्र कुमार का कहना है कि ईद के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। मगर मैनुअल टिकट की वजह से बस सेवा पूरी तरह से संचालित नहीं हो पा रही है। कार्यालय में भी एक रूट के मैनुअल टिकट का हिसाब लगाने में आधे घंटे तक का समय लग रहा है। परिचालक पुष्पेंद्र कुमार ने कहा कि रूट पर चलती बस में सभी का टिकट नहीं बन पाता है। बस में भीड़ होने से सभी का हिसाब नहीं लग पाता है। राजीव कुमार का कहना है कि उन्हें टिकट मशीन की आदत पड़ गई है। जिसकी वजह से वह रूट का किराया भूल गए हैं।
वर्जन::
टिकट मशीन बंद होने से मैनुअल टिकट बनाने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। परिचालकों को बस अड्डे पर ही ज्यादातर यात्रियों के टिकट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी परिचालकों को रूट पर जाने के लिए कहा गया है - धीरज सिंह पंवार, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, बिजनौर