कासमपुरगढ़ी में तीन तलाक पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन क्षेत्र में तलाक का एक अलग ही मामला देखने में आया है। पति द्वारा खर्च की लेनदेन के विवाद में मायके में रह रही एक विवाहिता ने भरी पंचायत में पति से खुद ही तीन तलाक मांग लिया।
विवाहिता की मांग को देखकर पंचायत वाले भी हैरान रह गए। विवाहिता की जिद पर पति ने फिलहाल उसे एक तलाक (तलाक रजई) दिया है। तलाक रजई में मियां और बीवी में उसके पति के बीच रजामंदी के लिए तीन महीने दस दिन का समय होता है। अगर रजामंदी हो गई तो महिला पहले की ही तरह बिना दूसरा निकाह किए अपने पति के साथ रह सकती है। अगर रजामंदी नहीं हुई तो दोनों के बीच खुद ही तीन तलाक हो जाएगा, चाहे पति तीन बार तलाक बोले या न बोले।
गांव सीरवासुचंद निवासी तुफैल अहमद का विवाह धामपुर निवासी सायरा खातून से दस वर्ष पहले हुआ था। इस दरमियान सायरा खातून ने एक पुत्री महक परवीन को जन्म दिया जो अब आठ साल की है। कुछ दिनों से पति पत्नी के बीच परिवार के खर्च के लेनदेन को लेकर विवाद चल रह था। सायरा ससुराल को छोड़कर अपने मायके चली गई। तुफैल ने उसे लाने का कई बार प्रयास किया, लेकिन सायरा ससुराल वापस नहीं आई। गांव कासमपुरगढ़ी में मियां-बीवी में रजामंदी को लेकर पंचायत बुलाई गई। पंचायत में विवाहिता, उसके पिता, भाई व रिश्तेदार मौजूद रहे। जबकि पति की ओर से गांव के लोगों ने भी पंचायत में भाग लिया। भरी पंचायत में सायरा ने अपने पति से तीन तलाक मांग लिया। दोनों पक्षों ने उसे समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन सायरा तलाक की जिद पर अड़ी गई। सायरा की जिद के चलते पंचायत ने तुफैल अहमद से उसे एक तलाक (तलाक रजई) दिलाया।
इसमें इद्दत यानी तीन महीना दस दिन होने से पूर्व यदि पति पत्नी आपस में रजामंदी कर लेते हैं तो बिना किसी निकाह के एक दूसरे के साथ रह सकते हैं। अगर रजामंदी नहीं हो पाती तो दोनों के बीच खुद ही तलाक हो जाता है। फिर चाहे पति पत्नी को तीन तलाक दे या न दे। पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो जाता है। फिर वह चाहकर भी एक दूसरे के साथ नहीं रह सकते है। दोनों को फिर से साथ रहने के लिए महिला को दूसरे व्यक्ति से निकाह करना होगा। हलाला के बाद महिला का शौहर उसे तलाक देता है उसके शौहर की मौत हो जाती है। तभी वह फिर से पहले पति से निकाह कर उसके साथ रह सकती है।
एक तलाक लेने के बाद सायरा अपने मायके चली गई।