इस बार कांवड़ियों की जेब पर पड़ेगा बोझ
धामपुर। अबकी बार महंगाई कांवड़ आस्था पर भारी पड़ रही है। जो कांवड़ पहले डेढ सौ रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक की बन कर तैयार हो जाती थी। वहीं इस बार एक हजार से 1500 रुपये तक में तैयार हो रही है। पहले कांवड़ को जत्थों के रूप में शिवभक्त भगवान शंकर के जयकारों के बीच गंतव्य को जाते थे पर आज केवल डीजे पर फिल्मी अंदाज में भजनों की धुन पर मनोरंजन के रूप में ले रहे हैं।
नर सेवा- नारायण सेवा संघ के संरक्षक लाला लाजपतराय मुखिया का कहना है कि जिस घर परिवार में कोई सदस्य कांवड़ लेने को हरिद्वार जाता था तो उसके घर में बुजुर्गों के नियम कायदे शुरू हो जाते थे। महिला उसी दिन से घर में नियम संयम के साथ रहकर संध्या होने पर एकत्र होकर भजनों के माध्यम से शिवभोले का गुुणगान करती थी। आज के दौर में सब कुछ बदल गया है। श्रद्धालु भारत भूषण शर्मा, वीरेंद्र सिंह मोरना का कहना है कि अब दिखावा ज्यादा होने लगा है। पहले कई माह पहले एक दूसरे को बता देते थे कि अबकी बार वह भी कांवड़ लेने जाएंगे। मुरादाबाद की सीता देवी ने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या कम है। पर महिलाओं श्रद्धालुओं में वृद्धि हुई है। घनश्याम सिंह का कहना है कि कोरोना के कारण प्रशासन की सख्ती के चलते हरिद्वार में रौनक बहुत कम है। शिवभक्तों की संख्या भी घटी है।