बिजनौर। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए जिले में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। ऐसे में जमीन का सेटेलाइट से मिलान होगा। सेटेलाइट फोटो में नया निर्माण मिलने पर अधिक मुआवजा नहीं मिलेगा। इसी को लेकर पहले से चिह्नित जमीन और उस पर बनी संपत्तियों का दोबारा सत्यापन किया जाएगा।
जिले के 109 गांव गंगा एक्सप्रेसवे की जद में हैं। अब इन गांवों में चिह्नित जमीन का फाइनल सर्वे शुरू कर दिया गया है। जमीन पर बनी संपत्ति के सत्यापन के बाद सेटेलाइट तस्वीरों से मिलान होगा। मुआवजा तय करने से पहले जमीन और संपत्तियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। किसी जमीन या संपत्ति में बदलाव मिलने पर उसकी भी जांच की जाएगी। अगर, किसी जमीन पर सेटेलाइट फोटो में नए निर्माण की पुष्टि होती है तो भूमि स्वामी को नए निर्माण का मुआवजा नहीं मिलेगा। बल्कि, पुरानी संपत्ति के आधार पर ही मुआवजा तय होगा। फाइनल सर्वे के बाद मुआवजे की दर निर्धारित करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
सर्वे के बाद तय होगी मुआवजे की दर
फाइनल सर्वे पूरा होने के बाद जमीन और संपत्तियों से संबंधित रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद मुआवजे की दर निर्धारित करने की कार्रवाई होगी। सर्वे के आंकड़े संबंधित विभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसी तरह की विसंगति न रहे।
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गंगा एक्सप्रेस का फाइनल सर्वे चल रहा है। चिह्नित जमीन का सेटेलाइट से भी मिलान होगा। नए निर्माण की पुष्टि होने पर नए निर्माण का मुआवजा नहीं मिलेगा। सर्वे प्रक्रिया तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ....शरद पाल, एडीएम न्यायिक, बिजनौर