- मासिक तीन से लेकर 10 फीसदी तक वसूला जाता है ब्याज
- साहूकारी पर पाबंदी के बाद भी बंद नहीं हो सकी सूदखोरी
अचल चौधरी
बिजनौर। सूदखोरों से लिए कर्ज पर ब्याज का पहिया हर महीने घूमता है, जबकि बैंकों में ब्याज दर वार्षिक पर आधारित होती है। इसके उलट सूदखोर मासिक आधार पर तीन प्रतिशत से लेकर 10 फीसदी तक ब्याज दर कर्ज देते हैं। हालांकि प्रदेश सरकार ने इस पाबंदी लगा दी थी, लेकिन सूदखोरी फिर भी बंद नहीं हो सकी।
स्योहारा थाना क्षेत्र में एक युवक ने सूदखोरों के कर्ज के चलते आत्महत्या कर ली। यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी लोग कर्ज के बोझ तले दबे अपनी जान दे चुके हैं। बता दें कि बैंकों के बजाय सूदखोरों से लिया गया कर्ज चुका ना कर्जदार के लिए बेहद मुश्किल होता है। सूत्रों की माने तो 50 हजार तक के कर्ज पर पांच फीसदी ब्याज लगाया जाता है। इस पांच फीसदी की गणना भी हर महीने होती है। वार्षिक तौर पर गणना की जाए तो यह 60 फीसदी तक पहुंचता है।
गांव देहात में 10 से 20 हज़ार तक सूदखोर 10 फीसदी मासिक ब्याज दर पर भी कर्ज मुहैया कराते हैं। हालांकि एक लाख से ज्यादा का कर्ज लेने पर ब्याज दर तीन फीसदी मासिक हो जाती है। इसकी भी वार्षिक आधार पर गणना की जाए तो यह भी 36 फीसदी बैठती है। जबकि बैंकों में वार्षिक आधार पर ब्याज दर 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होती। इसके अलावा जिले में जमीन का बैनामा करते हुए कर्ज लेने का चलन भी बढ़ा है। कई फाइनेंस कंपनियां और सूदखोर मोती रकम के कर्ज के बदले कदर की जमीन का बैनामा करा लेते हैं। इस पर भी भारी भरकम ब्याज वसूला जाता है अधिकांश मामलों में कर्जदार व्यक्ति अपनी जमीन भी लौट में सक्षम नहीं होता।
कर्ज की दलदल में फंस रही महिलाएं
बिजनौर में तमाम फाइनेंस कंपनी ऐसी है, जो की अपने एजेंटों के माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर समूह बनाकर महिलाओं को कर्ज बांट रही हैं। इन्हें एक मुश्त कर्ज देकर एक साल तक हर महीने किस्त के आधार पर वसूली की जाती है। हर महीने की निर्धारित तारीख को किस्त जमाने होने पर महिलाओं को दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है।