20 प्रतिशत रकबे में ही हुई बुवाई, विभाग कर रहा किसानों को प्रेरित
30 अक्तूबर तक चार हजार हेक्टेयर में गन्ने की बुवाई का लक्ष्य रखा गया
संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। खेतों के समय खाली न होने और कृषि क्षेत्रफल घटने के कारण शरदकालीन गन्ने की बुवाई का लक्ष्य भटक गया है। गन्ना विभाग की ओर से 30 अक्तूबर तक चार हजार हेक्टेयर में गन्ने की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। मगर, अभी तक 800 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही बुवाई हो सकी है।
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अमित कुमार पांडे ने बताया कि इस बार किसानों ने 0238 प्रजाति को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। 0238 प्रजाति में पिछले दो-तीन साल से भयंकर बीमारी आ रही है। इससे किसान और चीनी मिल को भारी नुकसान हो रहा है। अबकी बार किसानों की ओर से सीओएलके 16 202, 14201, सीओएस 17231, 13235 और सीओ 00118 प्रजाति के बीज से गन्ने की बुवाई की जा रही है।
चीनी मिल की ओर से गन्ना शोध संस्थानों से बीज के गन्ने की आपूर्ति कर किसानों को बुआई के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। मिल की ओर से अभी भी किसानों को बीज के लिए उन्नतशील प्रजाति का बीज दिया जा रहा है।
नर्सरी के लिए एकल आंख का बीज कराया जा रहा उपलब्ध
किसानों को प्रेरित कर नवीन गन्ने की बुवाई कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे किसान कम से कम आगामी गन्ने की बुवाई में अपने खेत की नर्सरी को प्रयोग में ला सके है। इसलिए किसानों को मिल की ओर से खुद अपनी लेबर लगा कर एकल आंख की बुवाई कराई जा रही है।
अधिक मुनाफे के लिए सहफसली खेती जरूर करें
गन्ना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अधिक मुनाफे के लिए किसान शरदकालीन गन्ने की बुवाई के साथ सह फसली खेती जरूर करें। गन्ने की सहफसली खेती में दलहनी और तिलहनी किसी भी प्रकार की फसल बोई जा सकती है। ऐसा करने से कम लागत में किसानों को अधिक लाभ होगा। गन्ने की पैदावार भी उत्कृष्ट होगी।