संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। हस्तिनापुर बारहसिंघा सेंक्चुअरि का दायरा अब हरिद्वार की सीमा तक हो जाएगा। डब्ल्यूआईआई(भारतीय वन्य जीव संस्थान) की रिपोर्ट के आधार पर नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें बिजनौर में 91 और मुजफ्फरनगर में 96 वर्ग किमी नए क्षेत्रफल को इको सेंसिटिव जोन में जोड़ने की सिफारिश की गई है। अब बिजनौर के शिकोहाबाद से लेकर हरिद्वार के पास कोटावाली तक इसकी सीमा हो जाएगा। इससे बारह सिंघा को संरक्षित तो किया ही जाएगा, साथ ही कई गतिविधियों पर रोक भी लग जाएगा।
हस्तिनापुर वन्य जीव विहार की पहली अधिसूचना वर्ष 1986 में की गई थी। मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर, हापुड़ में इसकी सीमाएं फैली हुई हैं। तीन साल पहले इसके क्षेत्रफल को निर्धारित करने के लिए डब्ल्यूआईआई से सर्वे कराया गया। इस सर्वे के आधार पर पांचों जिलों से करीब 200 गांवों को इसकी सीमा से बाहर कर दिया। साथ ही हस्तिनापुर सेंक्चुअरि को बारहसिंघा अभयारण्य का नाम भी दिया गया।
उप वन प्रभागीय अधिकारी बिजनौर ज्ञान सिंह ने बताया कि उसस समय डब्ल्यूआईआई के सर्वे में एक रिपोर्ट और थी। उसमें बैराज से लेकर हरिद्वार सीमा तक बारह सिंघा की मौजूदगी बताई गई और इसे भी सेंक्चुअरि में शामिल करने की सिफारिश की थी।
इसे प्रस्ताव में नहीं रखने जाने पर कुछ माह पूर्व नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ ने आपत्ति जताई। इसके बाद अब इस क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन में शामिल किया जा रहा है। इसके तहत बिजनौर में 91 और मुजफ्फरनगर में 96 वर्ग किमी नया क्षेत्रफल और बढ़ जाएगा। nइस क्षेत्र में नहीं होगा खनन, होगा वन्य जीवों का संरक्षण : जिस क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन में शामिल करने की बात कही जा रही है, उसका सीमा हरिद्वार में राजा जी पार्क की सीमा तक है। इको सेंसिटिव जोन में इस क्षेत्र के शामिल होने से यहां पर खेती तो होगी, पर कॉमर्शियल काम नहीं होंगे। खनन भी प्रतिबंधित हो जाएगा। इससे इस क्षेत्र में वन्य जीवों का संरक्षण आसान हो जाएगा।