गंगा किनारे बढ़ेगा जैविक खेती का दायरा
बिजनौर। केंद्र सरकार ने गंगा किनारे जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही है। जिले में गंगा किनारे करीब 1300 हेक्टेयर जमीन में पहले से ही जैविक खेती हो रही है। इसका रकबा और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। केंद्र सरकार इसे बढ़ावा देगी तो किसानों को और फायदा होगा। बजट में घोषणा के बाद करीब दो हजार हेक्टेयर जमीन जैविक खेती के अभियान में और जुड़ जाएगी।
साल 2020 केंद्र और प्रदेश सरकार ने गंगा यात्रा निकालकर गंगा किनारे जैविक खेती कराने की घोषणा की थी। जिले की 22 ग्राम पंचायतों को इस अभियान में शामिल किया गया था। जिले में करीब 1300 हेक्टेयर जमीन में जैविक खेती हो रही है। आमतौर पर किसान गन्ने, धान और गेहूं की जैविक खेती कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने एक कंपनी के माध्यम से जैविक फसलों की बिक्री की भी व्यवस्था की है। जैविक उत्पाद रसायन वाली फसलों से 40 प्रतिशत तक महंगे बिक रहे हैं। जिले में जैविक गन्ने से तैयार गुड़ को यूपी के अलावा दिल्ली और उत्तराखंड का भी बाजार मिला है। रसायनिक खेती वाले गुड़ के मुकाबले जैविक गन्ने के गुड़ के दाम दोगुना से भी अधिक महंगे हैं। जिले में गंगा की धारा के पांच किलोमीटर तक के दायरे को अब जैविक खेती के लिए चिह्नित किया गया है, इससे और दो हजार हेक्टेयर जमीन जैविक खेती के अभियान में शामिल हो जाएगी। केंद्र सरकार की घोषणा से जैविक खेती की ओर रुख कर रहे किसानों को फायदा होगा।
यहां हो रही है जैविक खेती
गंगा किनारे गांव सबलगढ़, तैय्यबपुर, रावली, दयाल वाला, रफीउल्लापुर, जहानाबाद, टीप, बसंतपुर, दत्तियाना, निजमतपुरा आदि गांवों में जैविक खेती हो रही है।