जमीन की खबर का जोड़....
- राजस्व अभिलेखों में कूट रचित एंट्री बनी थी घोटाले का आधार
- जांच के दायरे में फंस चुके हैं 11 गांव, चार गांव में हो चुका है खारिज का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। नगीना तहसील के 17 गांव में फैली झाड़ी जंगल और नदियों की 60 हजार बीघा जमीन घोटाला दो साल पहले उजागर हुआ था। लगातार की जा रही शिकायतों के बाद पड़ताल में साफ हुआ कि कूट रचित एंट्री इस घोटाले का आधार बनी। हालांकि 11 गांव की जमीनें जांच के दायरे में फंसी हुई हैं। जिनमें चार गांव की करीब 2400 बीघा जमीन से खातेदारों के नाम खारिज कर मूलश्रेणी में दर्ज करने आदेश पिछले साल जारी किए गए।
फसली वर्ष 1359 के राजस्व अभिलेखों में सिर्फ एक लाइन लिखी गई थी, बाहुक्म जंगलात आफिसर चंद्रभान सिंह को काश्त की अनुमति दी जाती है। जांच में सामने आया था कि इस आदेश से संबंधित कोई कॉपी भी रिकार्ड में नहीं मिली थी। आदेश जारी करने वाले अधिकारी का नाम भी सामने नहीं आया था। खैर मामला शासन तक पहुंचा और हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई। जिसके बाद 11 गांव में जमीनों की जांच शुरु करते हुए आदेश जारी किए गए। पिछले साल शंकरपुर की 570 बीघा, हल्लूवाला की 897 बीघा, इस्लामपुर कुतुब 345 बीघा और मुर्तजाबाद में 860 बीघा जमीन के अभिलेखों में खातेदारों के नाम खारिज करते हुए झाड़ी जंगल के नाम दर्ज करने आदेश हुए थे। इसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
एसडीएम के स्टेनो ने पकड़ा था मामला
इस जमीन घोटाले को सामने लाने में नगीना में एसडीएम के स्टैनो रहे किशनचंद ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ही शिकायत की, जिसके बाद जांच कमेटी का गठन हुआ था। बाद में हाईकोर्ट और एनजीटी में भी किशनचंद ने याचिका दायर की थी। सूत्रों का कहना है कि यूं तो इस मामले की शिकायत पहले से की जाती रही थी, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
बवाल मचा तो आदेश पर कर दिया स्टे
बिजनौर। नगीना में सौ बीघा जंगल और झाड़ी की जमीन एक व्यक्ति के नाम दर्ज करने के मामले का खुलासा हुआ तो सोमवार को बवाल मच गया। इस बवाल के बाद जहां प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हो गए, वहीं डीएम ने भी जांच कराने की बात की। इसके बाद वन बंदोबस्त अधिकारी सुमित सिंह ने सोमवार की शाम अपने आदेश पर स्टे कर दिया।