स्कूलों में डेढ़ माह बाद भी नहीं बढ़ी छात्रों की संख्या
बिजनौर। यूपी बोर्ड के विद्यालयों में खुलने के करीब डेढ़ माह बाद भी छात्रों की संख्या नहीं बढ़ी। कोरोना की दूसरी लहर की खबरों के बाद अभिभावकों ने छात्रों को स्कूल पढ़ने भेजने से हाथ खड़े कर दिए । नतीजतन स्कूल आ रहे छात्रों की संख्या कम होने लगी है।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए पढ़ाई जरूरी है, परंतु स्वास्थ्य की कीमत पर कतई नहीं। जिले में यूपी बोर्ड के 387 विद्यालय हैं। विद्यालय कोरोना के कारण मार्च से बंद थे। शासन ने 19 अक्तूूबर से कक्षा नौ से बारह तक के छात्रों के लिए स्कूल खोल दिए थे। इसके लिए विद्यालयों को अभिभावकों से सहमति पत्र लेना अनिवार्य किया गया था।
डीआईओएस दफ्तर के अनुसार 387 स्कूलों में कक्षा नौ से बारह तक एक लाख 34499 छात्र पंजीकृत हैं। इनमें 28569 अभिभावकों ने सहमति दी थी। लोगों को स्कूलों में कोरोना से बचाव के उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जागरूक किया गया। सूत्रों के अनुसार अभिभावकों ने सहमति के बाद भी छात्रों को स्कूल पढ़ने नहीं भेजा है। जो छात्र आए भी वे केवल बोर्ड परीक्षा या छात्रवृत्ति फार्म के सिलसिले में आए थे।
आरोप है कि स्कूलों में कक्षावार दो, चार तक छात्र आ रहे हैं। स्कूलों की बात मानें तो कोरोना की दूसरी लहर की खबरों ने छात्रों की संख्या भी कम कर दी है। अब अभिभावक छात्रों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं है। अनेक स्कूलों ने हाईस्कूल व इंटर के छात्रों की बोर्ड फीस जमा कर दी थी। आरोप है कि छात्र फीस देने भी नहीं आ रहे हैं।
आनलाइन पढ़ाई को लेकर हकीकत अलग
बिजनौर। शिक्षा विभाग के दावों के अनुसार छात्रों की आनलाइन पढ़ाई चल रही है। शिक्षक विषय तथा पाठ के अनुसार वीडियो बनाकर छात्रों को भेज रहे हैं। आरोप है कि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इक्का दुक्का स्कूल ही ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल कहते हैं कि प्रशासन असली स्थिति का आंकलन करे। छात्र हित पहले है।
प्रयोगात्मक परीक्षा को लेकर परेशानी
बिजनौर। हाईस्कूल तथा इंटर के छात्र प्रयोगात्मक परीक्षाओं के जल्द होने की सुगबुगाहट से परेशान हैं। उनका कहना है कि आनलाइन प्रैक्टीकल नहीं होते हैं। स्कूलों में प्रैक्टीकल हुए नहीं हैं। शासन ने 30 प्रतिशत प्रैक्टीकल कोर्स कम किया है। परंतु स्कूल इस बारे में कुछ बता नहीं रहे हैं।
आरजे पी इंटर कालेज बिजनौर के प्रधानाचार्य ओपी सिंह का कहना है कि अभिभावकों को बार बार सहमति पत्र के लिए कहा जा रहा है। अभिभावकों कह रहे हैं कि जब माहौल ठीक होगा बच्चों को पढ़ने भेज देंगे। सहमति देने वाले छात्र भी नहीं आ रहे हैं। जीजीआईसी की प्रधानाचार्य निर्मला शर्मा के अनुसार अभिभावकों को लगातार फोन किए जा रहे हैं। परंतु संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पावटी के प्रधानाचार्य अजब सिंह का कहना है कि अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। परंतु सहमति पत्र कम ही मिल रहे हैं।