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नई शिक्षा नीति से होगा उच्च शिक्षा का बाजारीकरण

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नई शिक्षा नीति से होगा उच्च शिक्षा का बाजारीकरण
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बिजनौर। नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव होंगे। स्नातक से लेकर रिसर्च क्षेत्र के मानकों में परिवर्तन किया गया हैं। विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को स्वायत्ता देने का प्रावधान है । नई नीति में महाविद्यालयों को बहुउद्देश्यीय संस्थानों में तब्दील करने की व्यवस्था भी रखी गई है। महाविद्यालय के शिक्षक नई शिक्षा नीति का अपने दृष्टिकोण से आंकलन कर रहे हैं।
देश की शिक्षा नीति में वर्ष 1986 के बाद बदलाव हुआ है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक पुरानी व्यवस्था को बदलकर आधुनिक परिस्थितियों के अनुसार तय करने का प्रयास है। नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा का स्वरूप बदलने पर जोर है। विदेशी विश्वविद्यालयों को अपनी शाखा देश में खोलने की अनुमति होगी। इन सभी के साथ विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों को स्वायत्ता देने पर जोर है। महाविद्यालयों के शिक्षक जहां नई शिक्षा नीति के कतिपय प्रावधान को स्वागत योग्य बता रहे हैं वही छात्रों के हितों से खिलवाड़ की आशंका जता रहे हैं।
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कॉलेज को बहुउद्देश्यीय संस्थानों में बदलने की योजना
गुलाब सिंह हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय चांदपुर में समाज शास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर अनिल कुमार वर्मा के अनुसार नई शिक्षा नीति में निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। नीति के लागू होने पर अगले 15 वर्ष में एक स्ट्रीम वाले संस्थानों को बंद कर दिया जाएगा।कॉलेजों को बहुउद्देश्यीय संस्थानों में बदलने की योजना है।
उच्च शिक्षा को निजीकरण की ओर धकेलने की कोशिश
वर्धमान कॉलेज बिजनौर में बीएड विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर सुनील कुमार जोशी का कहना है कि नई शिक्षा नीति के मसौदे में स्वायत्ता शब्द का इस्तेमाल 21 बार हुआ है। स्वायत्ता प्राप्त करने के बाद शिक्षकों की नियुक्ति , पाठ्यक्रम व फीस तय करना आदि संस्थाओं के हाथ में होगा। सरकार का नियंत्रण कम होने से शिक्षा का बाजारीकरण होगा।
मैनेजमेंट आर्थिक लाभ प्राप्ति में जुटेंगे
आरएसएम पीजी कॉलेज धामपुर के एसोसिएट प्रोफेसर अमित कुमार सिंह कहते हैं कि नई शिक्षा नीति स्वागत योग्य है। नई शिक्षा नीति में वर्ष 2035 में कॉलेजों की विश्वविद्यालय से संबद्धता समाप्त करना चिंताजनक है। इससे छात्रों की फीस में बढ़ोत्तरी होगी। कॉलेज की मनमानी बढ़ेगी। गरीब छात्रों की शिक्षा की मुश्किलें बढ़ेंगी।
खतरनाक हो सकती है विदेशी शाखा
साहु जैन कॉलेज नजीबाबाद में एसोसिएट प्रोफेसर अरुण देव का कहना है कि पढ़ाई में मातृभाषा को बढ़ावा देना अच्छा है। लेकिन विदेशी विश्वविद्यालयों की शाखा देश में खोला जाना खतरनाक हैं। गुणवत्तापूर्ण सर्वसुलभ शिक्षा के लिए आगे बढ़ने की जरुरत है
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रचनात्मक परिवर्तन आएगा
आरबीडी महाविद्यालय बिजनौर में शारीरिक शिक्षा विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर मंजू अरोरा का कहना है कि नई शिक्षा नीति में क्रेडिट बैंक सिस्टम के माध्यम से छात्रों के न केवल परिणाम सुरक्षित रहेंगे बल्कि नवाचार के साथ आत्मविश्वास बढ़ेगा।
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