- लगातार फरियाद के बाद भी नहीं मिल सका प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का लाभ
- मजलूम की मौत के बाद खुली अफसरों की दराजों में बंद पड़ी फाइल
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धर्मेंद्र भुईयार
स्योहारा। आवास की आस में एक से दूसरे दफ्तर और अफसरों के चक्कर काट रहा मजदूर आखिरकार जिंदगी की जंग हार गया। मजलूम की मौत के बाद अफसरों की दराजों में बंद पड़ी प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की फाइल के पन्ने पलटे गए। हालांकि अब सब कुछ बेमकसद और बेनतीजा ही साबित होगा।
बरसात का मौसम मजदूर पेशा वर्ग पर आफत बनकर टूट रहा है। कच्चे मकान जमींदोज होने की कगार पर हैं और जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। स्योहारा ब्लॉक क्षेत्र के गांव बिरामपुर निवासी 19 वर्षीय फैसल पुत्र मुर्तजा भी इसका शिकार बना। जर्जर हाल उसके घर का बरसात में गिरने का खतरा बना था। कच्चे मकान की दीवार गिराऊ हालत में थी। फैसल लगातार प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आवास निर्माण की फरियाद अफसरों के सामने लगा रहा था, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। सोमवार दोपहर कच्चे मकान की दीवार गिर गई और उसकी चपेट में आया फैसल घायल हो गया। उसे सीएचसी लाया गया, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। (संवाद)
बीमार पिता का इकलौता सहारा था फैसल
बेहद तंगहाली में गुजर कर रहे फैसल की माता का निधन दस वर्ष पूर्व हो गया था। पिता भी बीमार रहते हैं। फैसल ही जैसे-तैसे मजदूरी कर परिवार को चला रहा था। अब उसकी मौत के बाद बेबस और लाचार पिता के सामने भी आजीविका और बुढ़ापे के सहारे का संकट खड़ा हो गया है। फैसल की तंगहाली की तस्दीक ऐसे की जा सकती है कि उसकी मौत के बाद दफीने तक के पैसे परिवार के पास नहीं थे। समाजसेवी व आसपास के लोगों की आर्थिक मदद के बाद ही शव का दफीना किया जा सका।
कोट
मृतक के पिता का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में चार वर्ष पूर्व स्वीकृत हो चुका था। आवास के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं हुई थी। अब शीघ्र ही उनका प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास बनवा दिया जाएगा। अधिकारियों को रिपोर्ट बना कर भेजी जा रही है - करुणा चौहान, एडीओ पंचायत स्योहारा