बिजनौर/जलीलपुर। बारिश से एक तरफ जहां लोगों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर गंगा का जलस्तर बढ़ने से जलीलपुर ब्लॉक के नौ गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गांव मीरापुर सीकरी व गांव रायपुर खादर की आबादी के चारों ओर गंगा का पानी बह रहा है। इससे ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ गई है।
जलीलपुर गंगा खादर क्षेत्र के गांव सलेमपुर खादर, मीरापुर सीकरी, रायपुर खादर, जलालपुर खादर, नारनौर, जमालुदीनपुर, दत्तियाना, मुजफ्फरपुर खादर, स्याली के किसानों की हजारों बीघा फसल जलमग्न हो गई है। इससे किसानों के सामने पशुओं के लिए चारे की समस्या बन गई है। गहरे पानी से निकल कर पशु पालक किसान पशुओं का चारा लाने को मजबूर हैं। गांव रायपुर खादर को थाना, तहसील, ब्लाॅक व जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले एक मात्र रास्ते पर करीब दो फुट पानी बह रहा है। दूसरी जगह मजदूरी करने वाले लोग भी पानी से निकल कर जा रहे हैं। गांव नारनौर व पांडवनगर पुलिस चौकी के मेहती नदी के पुल के निकट गंगा से उफनाकर आया पानी बह रहा है।
बिजनौर बैराज पर 219.60 मीटर गंगा का जलस्तर -
बिजनौर बैराज पर गंगा खतरे के निशान को छूकर बह रही है। खतरे का निशान 220 मीटर है। जबकि बैराज पर गंगा का जलस्तर 219.60 मीटर चल रहा है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि अभी गंगा उफान पर है, जिससे गंगा किनारे के गांवों में बाढ़ का खतरा बना है।
जिले में सोमवार को तेज धूप निकली। इससे लोगों को गर्मी का अहसास हुआ। नगीना स्थित कृषि वेधशाला के अनुसार सोमवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.8 डिग्री सेल्सियस रहा। मंगलवार को भी मौसम साफ रहने की संभावना है।
साल 2013 में आई बाढ़ से बन गए थे 20 फुट ऊंचे रेत के टीले-
जलीलपुर क्षेत्र में गंगा के निकटवर्ती गांवों के लिए बरसात मुसीबत बनकर आता है। 2013 केदारनाथ त्रासदी के समय आई बाढ़ के बाद से समस्या बढ़ी है। उस समय गंगा के रौद्र रूप ने खादर क्षेत्र का भूगोल बदल दिया था। कई स्थानों पर 20 फुट ऊंचाई तक रेत के टीले बन गए थे। बेलया जंगल में पानी के साथ बहकर आए रेत ने दीवार का रूप ले लिया था। धीरे -धीरे यह रेत व अन्य सामग्री बहकर फिर से गंगा की मुख्य धारा में पहुंच गई। इस कारण पानी का फैलाव जल्दी हो जाता है। इसलिए गंगा में जमा सिल्ट व अन्य सामग्री की सफाई कराई जानी चाहिए।
गंगा पर बनवाया जाए तटबंध : शरद शर्मा
गांव सलेमपुर खादर के किसान शरद शर्मा ने कहा कि गंगा पर तटबंध बनवाया जाए। गंगा किनारे व्यापक पौधरोपण कर घना वन विकसित किया जाए। वन पानी के बहाव को रोकने में सहायक हो सकता हैं।
बाढ़ के डर से किसान खेत खाली छोड़ने को मजबूर : निछत्तर सिंह
गांव मीरापुर सीकरी के किसान निछत्तर सिंह ने बताया कि अधिकारियों से मिलकर अनेक बार तटबंध की मांग की है। बाढ़ के डर से किसान खेत खाली छोड़ने को मजबूर हैं। इस क्षेत्र के लिए तटबंध जरूरी है।
बाढ़ आने से खराब हो गए रास्ते : स्वर्ण सिंह लाडी
किसान स्वर्ण सिंह लाडी का कहना है कि बार-बार बाढ़ आने से रास्ते खराब हो गए हैं। किसानों को हर साल नुकसान हो रहा है। किसानों के हित में तुरंत तटबंध बनाया जाए। साथ ही बाढ़ रोकने के लिए उचित व्यवस्था करें।
गंगा से सिल्ट की निकासी कराकर गहराई बढ़ाई जाए : संदीप शर्मा
गांव जमालुदीनपुर के किसान संदीप शर्मा ने बताया कि साल 2013 के बाद से गंगा के तल की ऊंचाई बढ़ी है। जब तक तटबंध नहीं बन जाता है, तब तक गंगा से सिल्ट आदि की निकासी कराकर उसकी गहराई बढ़ाई जाए। ताकि पानी का एकदम फैलाव न हो सके।