बिजनौर। ऐतिहासिक और पौराणिक इतिहास को समेटे हुए मालन नदी पर एक बार फिर प्रशासन ने पुनरुद्धार के प्रयास शुरू कर दिए हैं। अब फिर से ड्रोन सर्वे कराकर इस नदी को इसका मूल स्वरूप लौटाने की तैयारी हो रही है। सरकारी रिकॉर्ड की बात करें तो मालन की धारा 40 से 70 मीटर तक चौड़ी है, लेकिन धरातल पर अधिकांश जगहों यह नदी नाले का स्वरूप ले चुकी है।
वर्तमान में मालन और प्राचीन काल में मालिनी कहलाने वाली नदी का उद्गम पौड़ी जिले की चंडा पहाड़ियों से माना जाता है।
बिजनौर में हल्दूखाता से मालन प्रवेश करती है। जिले में 53 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद गंगा में मालन का मिलन रावली में स्थित कण्व आश्रम के पास हो जाता है। डीएम जसजीत कौर ने अब अधिकारियों की बैठक बुलाकर इस नदी को दोबारा मूल स्वरूप की रणनीति पर चर्चा की।
डीएम ने कहा कि गंगा और मालन नदी का संगम स्थल वर्तमान में जिले का एक पर्यटन स्थल बन रहा है। पौराणिक दृष्टिकोण से मालन नदी का पुनरूद्धार किया जाना अत्यंत आवश्यक है।