बिजनौर। दुग्ध उत्पादन में नुकसान झेलने वाले किसानों के दिन बहुरने वाले हैं। चीनी की तरह घाटे का शिकार हुआ दुग्ध व्यवसाय अब धीरे-धीरे उबरने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूध के पाउडर के रेट बढ़ने से स्थानीय स्तर पर भी दूध के दाम बढ़ने लगे हैं। हालांकि अभी दूध के दाम दो साल पहले की तुलना में कम हैं, लेकिन इनमें सुधार होना शुरू हो गया है। पराग डेयरी ने 30 के स्थान पर इसके दाम बढ़ाकर 35 रुपये लीटर कर दिए हैं। अन्य प्राइवेट डेयरी भी दूध के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
जिले के किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। लेकिन गन्ने के बाद किसानों को दूध का सहारा होता है। पहले किसान पारंपरिक तौर पर ही पशुपालन करते थे। लेकिन धीरे-धीरे कुछ साल पहले किसानों ने दुग्ध व्यवसाय को अपनाना शुरू कर दिया। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आए और किसानों ने हर साल करोड़ों रुपये का दूध बेचा। पहले जिले में केवल सहकारी क्षेत्र की पराग डेरी थी। लेकिन दूध का काम अच्छा होने के कारण प्राइवेट कंपनियों ने भी जिले में दूध की खरीदारी शुरू की। किसानों को दुग्ध उत्पादन से जोड़ने के लिए सरकार ने भी कई योजनाएं चलाईं। लेकिन पिछले दो सालों से किसानों को दुग्ध उत्पादन में नुकसान उठाना पड़ा।
दूध के दाम चीनी की तरह 25 प्रतिशत तक गिर गए थे। 38 रुपये प्रति लीटर बिकने वाले दूध के दाम गिरकर 30 रुपये प्रति लीटर रह गए थे। वजह था अंतरराष्ट्रीय बाजार में अति आवक के कारण दूध के पाउडर के रेट गिरना। दूध के दाम गिरने से किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। पिछले साल दूध के अधिकतम दाम 33 रुपये प्रति लीटर थे। लेकिन इस साल स्थिति में सुधार आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूध के पाउडर के दाम बढ़े हैं। इससे स्थानीय स्तर पर भी डेरियों ने दूध के दाम बढ़ाए हैं। पराग ने भी दूध के दाम 35 रुपये प्रति लीटर कर दिए हैं। अभी दाम और बढ़ने की उम्मीद है।
जिले में नौ लाख लीटर दूध का उत्पादन रोज
कुछ साल पहले पराग डेयरी की ओर से कराए गए एक सर्वे के अनुसार जिले में करीब नौ लाख लीटर दूध का उत्पादन प्रतिदिन होता है। जिले में बड़ी संख्या में किसान पशु पालन से जुड़े हैं। जिले में प्राइवेट डेयरी नमस्ते इंडिया, गोपालजी, सहज, मदर डेरी, जेके डेरी, भोले भंडारी, अमूल आदि दूध खरीद रही हैं। ये डेयरी 35 से 36 रुपये प्रति लीटर पर दूध खरीद रही हैं। पिछले दो साल में पशुपालन किसानों के लिए बहुत महंगा हो गया है। खल की बोरी पर 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़े हैं। इसके अलावा इस बार सर्दियों में भूसे के दाम ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। भूसा 1100 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था।
शहरों के पास दूध 50 रुपये लीटर
शहरों के पास लगने वाले गांवों में डेयरी द्वारा दूध के रेट गिरने का कोई फर्क नहीं पड़ा। शहरों के पास के गांवों में दूध के दाम अब भी 50 रुपये प्रति लीटर तक चल रहे हैं। डेयरी आमतौर पर शहरों से दस किलोमीटर के दूर के गांवों से दूध खरीदती हैं। इन गांवों के किसान खुद दूध बेचने के लिए शहर नहीं आ जाते हैं। डेयरी के आने से इनका दूध घर से ही बिक जाता है। दुग्ध उत्पादन के लिए दो बार गोकुल पुरस्कार जीत चुके गांव बसेड़ी के डेयरी संचालक राजवीर सिंह के अनुसार दुग्ध उत्पादन में घाटा हो रहा है। अब दूध के दाम कुछ सुधरे हैं। सरकार को चीनी की तरह दूध के भी न्यूनतम दाम तय करने चाहिए।
मांग बढ़ी तो और बढ़ेंगे दाम
पराग डेरी के स्थानीय प्रभारी एके तिवारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूध के पाउडर के दाम बढ़े हैं। इसका असर दूध के दामों पर भी पड़ेगा। पराग ने भी दूध के मूल्य में बढ़ोतरी कर दी है। मांग बढ़ने पर दूध के दाम और बढ़ाए जा सकते हैं।