कागजों से धरातल पर नहीं उतरा तटबंध, बाढ़ की चिंता में डूबे किसान
बिजनौर। जो उलझकर रह गई वो फाइलों के जाल में, गांव तक वो रोशनी आएगी कितने साल में...जनकवि अदम गोंडवी की ये लाइने गंगा किनारे बनने वाले तटबंध के लिए कही जाएं तो गलत न होंगी। दो दशक से तटबंध की फाइलें दफ्तरों के चक्कर ही काट रही हैं। नाबार्ड से 61 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी तो मिली, लेकिन बजट जारी नहीं हुआ। हालात यह है कि इस बार भी बरसात से पहले तटबंध निर्माण की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। एक ओर जहां कागजों से तटबंध धरातल पर नहीं उतर रहा, वहीं गंगा किनारे बाढ़ प्रभावित गांवों के किसान बाढ़ की चिंता में डूब रहे हैं।
गंगा में बरसात के दिनों में हर साल बाढ़ आती है। अब तक हजारों बीघा जमीन गंगा में कटान की भेंट चढ़ चुकी है। बिजनौर में गंगा के प्रवेश स्थल से लेकर रावली घाट तक तटबंध बनाने की मांग यूं तो कई दशकों से चली आ रही है, लेकिन करीब दो दशक इसके प्रस्ताव तैयार करने और इसे मंजूरी दिलाने में ही लग गए। करीब दो साल पहले प्रस्ताव बना तो पिछले साल नाबार्ड से तटबंध बनाने की आस जग गई। नाबार्ड से बजट को मंजूरी मिली तो इस साल बरसात से पहले तटबंध बनाने के दावे भी हुए, लेकिन सच्चाई तो यह है कि अभी तक नाबार्ड से बजट की धनराशि जारी ही नहीं हुई है। यदि अगले एक पखवाड़े में धनराशि जारी भी होती है तो भी बरसात में तटबंध बनना अब मुमकिन नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में इस बरसात में फिर से ग्रामीणों को बाढ़ का दंश झेलना पड़ेगा।
इन गांवों में गंगा करती है कटान
गंगा किनारे कुंदनपुर टीप, फतेहपुर, सीमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डैबलगढ़, चाहड़वाल, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सीमली खुर्द, स्योहारा, मागनवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांवों की ओर गंगा कटान कर रही है।
वर्जन ...
गंगा पर तटबंध के लिए नाबार्ड से बजट मिलना था। अभी तक बजट की धनराशि जारी नहीं हुई है। बजट मिलने के बाद तटबंध का काम शुरू कराया जाएगा। -राकेश कुमार, नोडल अफसर बाढ़ एवं अधिशासी अभियंता अफजलगढ़ सिंचाई खंड
पिछले दस सालों से गंगा नदी गांव में कटान कर रही है। प्रशासनिक अधिकारी आते है और ग्रामीणों को तटबंध बनाने का आश्वासन दे जाते है, लेकिन धरातल पर कटान रोकने के लिए कोई कार्य नहीं किया जा रहा है।
- भूपेंद्र सिंह, निवासी गौसपुर।
सिंचाई विभाग की ओर से कटान रोकने के लिए बनाए गए अस्थायी स्टड गत बरसात में पानी के तेज बहाव में बह गए थे। अधिकारियों ने बरसात के बाद स्थायी स्टड बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- दीपक कुमार, निवासी गौसपुर।
गांव से गंगा नदी की दूरी मात्र 60 मीटर रह गई है, लेकिन सिंचाई विभाग गौसपुर के कटान को लेकर गंभीर नहीं है। ग्रामीणों की मांग के बावजूद कटान रोकने के लिए अभी तक पक्के तटबंध नहीं बनाए गए हैं।
- विपिन कुमार, निवासी गौसपुर।
यदि बरसात से पहले गांव में कटान रोकने के इंतजाम नहीं किए गए तो ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। साथ ही गांव के प्रति अधिकारियों की उदासीनता की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की जाएगी।
- कुलदीप कुमार, निवासी गौसपुर।