कोरोना के कारण पूरी नहीं हो सकी देहदान की इच्छा
बिजनौर। चिकित्सा विज्ञान में शोध के महत्व को समझते हुए अपने शरीर को दान करने वाले चौधरी हरपाल सिंह मलिक की कोरोना वायरस के चलते इच्छा पूरी नहीं हो सकी। परिजनों के अनुसार उन्होंने 29 जून 2013 को स्वेच्छा से देह दान का संकल्प लिया था। उन्होंने इसकी सूचना मेडिकल कॉलेज मेरठ के शरीर रचना विभाग को दी थी। कोरोना महामारी के कारण यह इच्छा पूरी न होने पर विभागाध्यक्ष डॉ. जीएल निगम ने परिजनों को आभार पत्र भेजकर आभार जताया है।
नगर के मोहल्ला सिविल लाइन प्रथम निवासी एवं सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ के शोध संस्थान, नगीना के शोध वैज्ञानिक एवं प्रभारी अधिकारी डॉ. राजेंद्र मलिक के पिता चौधरी हरपाल सिंह मलिक की 15 अप्रैल को मृत्यु हो गई। डॉ. राजेंद्र के अनुसार उनके पिता मृदुभाषी थे। उन्होंने स्वेच्छा से ही अपने जीवित रहते हुए 29 जून 2013 को अपना शरीर दान करने का संकल्प लिया था। किंतु कोरोना महामारी के चलते ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद इसकी सूचना मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को दे दी गई, किंतु मेडिकल कॉलेज ने कोरोना महामारी के कारण असमर्थता व्यक्त की। इस पर प्राचार्य ने उन्हें आभार पत्र भेजकर बताया कि ऐसी उत्तम सोच रखने वाले चौधरी हरपाल सिंह का यह समाज हमेशा ऋणी रहेगा।