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स्वतंत्रता की दीवानगी, बेटे का नाम ही रख दिया क्रांति

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भोलानाथ त्यागी। - फोटो : BIJNOR
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स्वतंत्रता की दीवानगी, बेटे का नाम ही रख दिया क्रांति
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बिजनौर। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गोविंद सहाय का स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। देशभक्तों द्वारा चलाए गए आंदोलन की क्रांति से प्रेरित होकर उन्होंने अपने पुत्र का नाम भी क्रांति रख दिया था।
वरिष्ठ इतिहासकार भोलानाथ त्यागी बताते हैं कि गोविंद सहाय का जन्म 1907 में विकास खंड मोहम्मदपुर देवमल के ग्राम गजरौला शिव में हुआ था। कॉलेज में अध्ययन के दौरान इन्होंने आंदोलनों में भाग लेना शुरू कर दिया था। साहित्य पढ़ने में इन्हें बहुत रूचि थी। दुनिया के बड़े लेखकों को इन्होंने पढ़ा और आजादी के प्रति समर्पित होकर सन 1925-26 से स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। 1930 के नमक आंदोलन में इनको चार महीने की सश्रम कारावास का दंड मिला। सन 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में एक साल के लिए जेल भेज दिया गया। कुल सात बार जेल गए और छह वर्ष कारावास में गुजारे। इस दौरान कुल 350 रुपये का जुर्माना भी भुगतना पड़ा। 1930 से लेकर आजादी तक ऐसा कोई आंदोलन नहीं रहा, जिसमें ये जेल न गए हो। फरार होने के दौरान उन्होंने भी ग्राम पैजनिया में शरण ली थी। इनको बरेली और लखनऊ की जेलों में भी भेजा गया। जहां पंडित नेहरू, रफी अहमद किदवई जैसे राष्ट्रीय नेताओं से इनका संपर्क हुआ। जिससे इनका मनोबल और बढ़ा।
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बिजनौर के इतिहास के जानकार हेमंत कुमार बताते हैं कि इनकी माता सुखदेई देवी को भी जेल भेजा गया। 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में इनकी पत्नी राजदुलारी भी चार माह के लिए जेल भेजी गईं । तब इनकी गोद में आठ-दस माह का पुत्र भी था। जिनका नाम सन 1942 की अगस्त क्रांति से प्रेरित हो क्रांति कुमार रखा था। स्वाधीनता के बाद राजनीति में रम गए और चार बार विधानसभा सदस्य बने। इनको कई बार मंत्री पद दिए गए और महत्वपूर्ण समितियों का अध्यक्ष बनाया गया। गोविंद सहाय मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत के सभा सचिव बने। 1946 में जेल सुधार समिति के अध्यक्ष, 1961 में कारागार सहायता एवमं पुनर्वास राज्य मंत्री, 1962 में कारागार मंत्री फिर वन मंत्री बने। सन 1962 में इन्होंने यूनाइटेड नेशंस ऑर्गेनाइजेशन में भारत का प्रतिनिधित्व कर जनपद का नाम रोशन किया। आठ बार विदेश की यात्राएं की। गोविंद सहाय हिंदी, अंग्रेजी और भाषण कला में प्रवीण थे। उन्होंने कुल 15 पुस्तक लिखीं। इनका देहांत 1967 में हुआ।

हेमंत कुमार।- फोटो : BIJNOR

गोविंद सहाय। फाइल फोटो- फोटो : BIJNOR

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