जिला अस्पताल में फुल हो गए बेड
बिजनौर। जिला अस्पताल में मरीजों के सामने बेड का संकट गहराने लगा है। इसी के साथ ऑक्सीजन लगाने के लिए रेग्यूलेटर, नोजिल आदि की कमी भी मरीजों पर भारी पड़ रही है। ऑक्सीजन की कमी के चलते निजी अस्पतालों ने करीब एक सप्ताह पूर्व ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भर्ती करने से हाथ खड़े कर रखे हैं। इस कारण जिला अस्पताल का भार और अधिक बढ़ गया है। फिलहाल जिला अस्पताल में बेड फुल हो चुके हैं। जल्द ही प्रशासन कोई विकल्प नहीं तलाशता है तो बड़ी संख्या में मरीजों की जान खतरे में आ सकती है।
करीब दो सप्ताह से कोरोना ने कहर बरपा रखा है। बड़ी संख्या में मरीज संक्रमित हो रहे हैं। सरकारी में सुविधाएं नहीं है तो प्राईवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो चुकी है। भले ही स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में मौत कम हो रही हों, लेकिन हकीकत डरावनी है। जिले भर के निजी अस्पतालों में भर्ती न होने के कारण अब जिला अस्पताल ही सहारा बचा था, लेकिन अब यहां पर भी बेड के लिए मारामारी होने लगी है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद ने बताया कि फिलहाल उनके यहां पर 106 बेड का अस्पताल संचालित है और इसके अतिरिक्त दस बेड इमरजेंसी में आरक्षित हैं। साथ ही कोविड एल-2 विंग 100 बेड का संचालित है। इनमें दो आईसीयू वार्ड शामिल हैं। यहां पर केवल कोरोना संक्रमित मरीज ही भर्ती किए जाते हैं।
कैसे लगेगी ऑक्सीजन, उपकरण ही खत्म
भले इस जिला अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन ऑक्सीजन लगाने के लिए लगने वाले उपकरण, जैसे रेग्यूलेटर, नोजिल आदि की भारी कमी हो गई है। यहीं नहीं, मार्केट में भी इसकी काफी कमी है। जिला अस्पताल में जो नोजिल और रेग्यूलेटर लगे हैं, उनमें से अधिकांश खराब हालत में हैं या लीकेज हो रहे हैं। यही स्थिति रही तो हालात और बदतर हो सकते हैं। इस संबंध में सीएमएस डॉ.ज्ञानचंद कहते हैं कि इन उपकरण की कमी को पूरा करने के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है।