- गर्मी के मौसम में तेंदू का फल भालू का होता है प्रिय भोजन
- इस बार तेंदू फल नहीं आने से वनों के अंदर चले गए हैं भालू
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। कालागढ़ के वनों में इस बार तेंदू के पेड़ों पर फल नहीं आने से भालू अपने वैकल्पिक भोजन की तलाश कर रहे हैं। तेंदू भालुओं का प्रिय फल होता है। वे इन फलों को खाने के लिए पेड़ों के आसपास डेरा जमाए रहते हैं। तेंदू की कमी होने पर भालुओं को भोजन के लिए शहद, बांस की पत्तियों व शिकार से ही पेट भरना होगा।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में वन्यजीवों की अनोखी दुनिया निवास करती है। यहां हिंसक जीवों के लिए छोटे जीव हैं तो शाकाकारी जीवों के लिए वनस्पति व फल के वृक्ष मौजूद हैं। प्रकृति सभी का ध्यान रखती है। वनों में भालू गर्मी के मौसम में तेंदू के फल खूब खाते हैं। इसके अलावा बांस, मधुमक्खियों के छत्ते का शहद भी भालुओं का भोजन है। इनमें भालू को सबसे अधिक प्रिय तेंदू का फल है। वह इस वृक्ष के आसपास ही अक्सर दिखाई देते हैं।
गर्मी के मौसम में यह फल पकने लगता है। भालू पेड़ों के निकट डेरा डाल देता है। वह बड़े ही चाव से फल का सेवन करता है। इस बार वनों में तेंदू के पेड़ फलों से खाली हैं। अपना प्रिय फल नहीं मिलने से भालू अंदर वनों में अपना आहार खोज रहे हैं। पूर्व डीएफओ नरेंद्र सिंह का कहना है कि वनों में वन्यजीवों की अपनी आहार श्रृंखला है। इस बार तेंदू पर फल नहीं आने से भालू को वैकल्पिक भोजन की तलाश है। वह सर्वाहारी जीव है। अनेक बार तो वनों में बाघ तक के शिकार पर हाथ साफ कर लेता है। तेंदू के फल का वह शौकीन है। इस बार फल न मिलने से वह दूसरे विकल्प तलाशेगा।
- सड़क के किनारे तेंदू के पेड़ों से बनाई दूरी
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वार्डन बिंदरपाल का कहना है कि गर्मी के मौसम में तेंदू के पेड़ों के निकट जाना खतरे से खाली नहीं होता। यहां फल होने पर भालू का होना संभव होता है। इस बार पेड़ों पर फल नहीं होने पर भालू तेंदू के पेड़ों से दूर जंगल में भोजन के स्रोत ढूंढ रहा है। यह सब प्राकृतिक होता है। कभी-कभी तेंदू पर फल नहीं आते हैं। उम्मीद है कि अगली बार पेड़ों पर खूब फल आएंगे।
क्या है तेंदू
तेंदू (इंडियन पर्सिमॉन) भारत के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला एक औषधीय पौधा है। इसका फल पौष्टिक और स्वाद में मीठा होता है। यह दिखने में चीकू की तरह होता है। तेंदू यह पाचन तंत्र के लिए अच्छा तथा पेट को ठंडक प्रदान करता है। इसके अंदर चीकू की तरह बीज निकलते हैं। तेंदू के पत्तों का उपयोग बीड़ी बनाने के लिए किया जाता है।