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ट्रेनों का संचालन ठप होने से छूटे पसीने

Mon, 25 Jul 2016 12:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच सुकरो नदी पर रेल पुल को बचाने में जुटे कई स्टेशनों से आए मजदूर। - फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद में कोटद्वार ब्रांच लाइन पर पैसेंजर ट्रेनों का संचालन जल्द सुचारु कराने में जुटे रेल अधिकारियों के पसीने छूट गए हैं। अब तक की तमाम कोशिशों के बावजूद  रेल अधिकारियों को 20.6 मीटर लंबा लोहे का गार्डर नहीं मिल सका है। नतीजतन नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच ट्रेनों का संचालन जल्द शुरू होने की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है।
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नजीबाबाद-कोटद्वार रेलमार्ग पर शनिवार अलसुबह 4.30 बजे सुकरो नदी पर रेलवे पुल का पिलर गिरने से हड़कंप मच गया है। चौकीदार की सजगता से ट्रेन हादसा टल गया था। इस घटना के  बाद रेल महकमे के अधिकारी सक्रिय हुए। रविवार सुबह पीडब्लूआई बिजनौर धर्मेंद्र चौहान के नेतृत्व में नजीबाबाद, मुरादाबाद, अमरोहा, हरिद्वार, रुड़की, देहरादून के रेल मजदूरों ने नदी क्षेत्र में हुए कटान से पुल को बचाने का कार्य शुरू किया। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से बोल्डर रेल पुल के आसपास लाकर डाला जा रहा है। करीब 150 मजदूरों की अलग-अलग टीमें बनाई गईं हैं। कुछ टीमें सुकरो नदी की दोनों साइडों में हो रहे कटान को रोकने के लिए बंदा बनाने में जुटी हैं, जबकि कुछ टीमें रेलवे पुल के अन्य स्पान (पिलर) के चारों ओर हुए कटान वाले क्षेत्र में लोहे की तारों के जाल में बोल्डर भरकर नौकी बनाने में लगी हैं।
उधर, रेलवे पुल का नजीबाबाद एंड से चौथा पिलर गिरने से तीसरे व पांचवें पिलर पर एकाएक भार बढ़ गया। इससे पहले कि कोटद्वार सहित पर्वतीय क्षेत्र में तेज बारिश से सुकरो नदी में उफान आने से पहले रेलवे अधिकारी उस पर 20.6 मीटर लंबा गार्डर डालने की तैयारी में जुट गए हैं। अफसरों के प्रयास के बावजूद अब तक इतनी लंबाई एवं अपेक्षित क्षमता का गार्डर उपलब्ध नहीं हो सका है। रेल अधिकारी दबी जुबान कह रहे हैं कि नदी में बह रहे पानी का रास्ता बदलकर हर हाल में ध्वस्त स्पान का दोबारा निर्माण कराया जाएगा।
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