1962 तक अभिलेखों में हुआ करती थी मालन नदी, अब रिहायशी जमीन
मालन नदी का पानी आबादी में घुसने की वजह नदी का मार्ग तंग होना भी
नदी से 200 मीटर की दूरी पर पत्थरों का तटबंध बनाकर किया जा रहा निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद। 1962 तक चकबंदी अभिलेखों में जहां कभी मालन नदी बहती थी, वहां अब आलीशान मकान बनाए जा रहे हैं। जिस स्थान पर मालन नदी को बेदखल कर संक्रमणीय भूमिधर भूमि घोषित की गई, वहां से प्रशासन ने शनिवार को 15 लोगों को रेस्क्यू कर उनकी बचाई। हालात यह है कि नदी से करीब 200 मीटर की दूरी पर पत्थरों का तटबंध बनाकर निर्माण किया जा रहा। नदी का रुख 90 डिग्री पर पर मोड़ दिया है।
हरिद्वार मार्ग स्थित मालन नदी के मुख्य पुल और काली मंदिर क्षेत्र के रपटा पुल के बीच में हाल ही में निर्मित की गई अबू कॉलोनी शनिवार की देर शाम मालन नदी के उफान के बीच में घिर गई। कॉलोनी के मकान में रह रहे कई लोगों की जान जोखिम में पड़ गई। एसडीएम, सीओ, तहसीलदार की देखरेख में रेस्क्यू अभियान चला। पीएसी के गोताखोरों, राजस्व और पुलिस टीम ने छह महिलाओं और बच्चों सहित 15 लोगों को रेस्क्यू कर उनकी जान बचाई।
काली मंदिर क्षेत्र के मालन नदी रपटा पुल से करीब 200 मीटर की दूरी पर पत्थरों का तटबंध बनाकर अबू कॉलोनी में भवनों का निर्माण किया जा रहा है। तटबंध ने नदी की दिशा को पूरी तरह मोड़ दिया है। हर कोई हैरत में है कि आखिर दोनों पुलों के बीच नदी का रुख कैसे 90 डिग्री पर मुड़ गया।
चकबंदी रिकॉर्ड में मालन नदी, अब है कॉलोनी
मालन नदी के मुहाने पर स्थित अबू काॅलोनी में हादसा टलने के बाद प्रशासन रिकॉर्ड खंगाल रहा है। वर्ष 1962 में चकबंदी रिकॉर्ड में खसरा नंबर 371 में रेत और 372 में मालन नदी होने के प्रमाण हैं। अब विनियमित क्षेत्र से वर्ष 2011-12 में अप्रूव्ड कॉलोनी है।
राजस्व विभाग देता रहा हरी झंडी
चकबंदी रिकॉर्ड में मालन नदी दर्ज भूमि की श्रेणियां राजस्व परिषद की मेहरबानी से बदलती रहीं। पहले आसामी पट्टे दिए गए। पांच वर्ष बाद पट्टे खारिज हुए तो कमिश्नर मुरादाबाद से पहले पट्टे बहाल किए गए और फिर आसामी श्रेणी से बदलकर संक्रमणीय श्रेणी कर दी गई। मालन नदी की मुख्य धारा को नजर अंदाज कर कैसे राजस्व विभाग ने पट्टा श्रेणियां परिवर्तित कीं, जिस लेकर राजस्व अधिकारी भी हैरत में हैं।
निरस्त हो सकता है जारी नक्शा
वर्तमान में अबू कॉलोनी के नाम से विकसित की जा रही कॉलोनी का विनियमित क्षेत्र से वर्ष 2011-12 का तागरा इंटरप्राइजेज लिमिटेड के नाम से नक्शा स्वीकृत है। 6800 वर्ग मीटर के लिए जारी किया गया नक्शा नदी बहाव से 100 मीटर के दायरे में आता है।
संबंधित मामले में छानबीन शुरू कर दी है। प्रशासन की ओर से विनियमित क्षेत्र से जारी कॉलोनी का नक्शा निरस्तीकरण की गाज गिर सकती है। - कुंवर बहादुर सिंह, एसडीएम